Wednesday, 16 March 2022

नई शिक्षा नीति 2020 New education policy 2020

नेशनल एजुकेशन पॉलिसी :- 21वीं सदी के 20 वे साल में भारत में नई शिक्षा नीति आई है। भारत में
सर्वप्रथम 1968 में नई शिक्षा नीति बनाई गई थी उसके बाद 1986 में बनाई गई जिसके बाद नई शिक्षा नीति को 1992 में संशोधित किया गया। लगभग 34 साल बाद 2021 में पुनः नई शिक्षा नीति को लेकर अहम बदलाव किए गए हैं। जिसमे शिक्षा सम्बन्धित बहुत से नियमों में बदलाव किया गया है। वही हाल ही में मानव संसाधन प्रबंधन मंत्रालय ने शिक्षा नीति में बदलाव के साथ साथ अपने मंत्रालय का नाम भी बदल दिया है, मानव संसाधन प्रबंधन मंत्रालय को अब शिक्षा मंत्रालय के नाम से जाना जाएगा। 
National education policy तहत शिक्षकों के लिए  व्यवसायिक विकास को जरुरी कर दिया गया है और शिक्षकों के लिए सर्विस ट्रेनिंग का आयोजन भी किया जाएगा जिसमे शिक्षकों को ट्रेनिंग दी जायेगी। आइए जानते हैं, नेशनल एजुकेशन पालिस क्या है, New Education Policy PDF (NEP) कैसे डाउनलोड की जा सकती हैं आदि लेख में दिया जा रहा है।

यह लेख https://hindi.nvshq.org/ वेबसाईट से साभार लिया गया है और इसका उद्देश्य नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों को सब तक पहुचाना है.

 

नेशनल एजुकेशन पालिसी 2021 का उद्देश्य

नई राष्ट्रीय एजुकेशन नीति का मुख्य उद्देश्य भारत को वैश्विक स्तर पर शैक्षिक रूप से महाशक्ति बनाना तथा भारत में शिक्षा का सार्वभौमीकरण कर शिक्षा की गुणवत्ता को उच्च करना है।

नई शिक्षा नीति क्या है?

नई शिक्षा नीति 2021 के तहत 2030 तक शैक्षिक प्रणाली को निश्चित किया गया है और वर्तमान में चल रही 10 + 2 के मॉडल के स्थान पर पाठ्यक्रम में 5 + 3 + 3 + 4 की शैक्षिक प्रणाली के आधार पर पाठ्यक्रम को विभाजित किया जाएगा। नई शिक्षा नीति 2021 के लिए केंद्र तथा राज्य सरकार के निवेश का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है जिसमें केंद्र तथा राज्य सरकार शिक्षा क्षेत्र सहयोग के लिए देश की 6% जीडीपी के बराबर शिक्षा क्षेत्र में निवेश करेगी।

नई शिक्षा नीति के उद्देश्य

नई शिक्षा नीति का उद्देश्य शैक्षिक क्षेत्र में भारत को वैश्विक महाशक्ति बनाना है और भारत के लिए नई शैक्षिक नीतियां के माध्यम से संपूर्ण भारत में शिक्षा का उचित स्तर प्रदान करना है जिससे शैक्षिक क्षेत्र की गुणवत्ता उच्च हो सके। भारत में बच्चों को तकनीकी तथा रचनात्मकता के साथ-साथ शिक्षा की गुणवत्ता का महत्व से अवगत कराना नई शिक्षा नीति का उद्देश्य है जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो सके। शिक्षा में गुणवक्ता लाने के लिए यह केंद्र सरकार के तहत नई शिक्षा नीति को शुरू किया गया है।

National Education Policy 2021 की विशेषताएं

  • नई शिक्षा नीति स्वतंत्र भारत के तीसरी शिक्षा नीति है जिसमें बुनियादी तौर पर बदलाव किए गए हैं।
  • नई शिक्षा नीति के तहत शैक्षिक क्षेत्र को तकनीकी से भी जोड़ा जाएगा जिसमें सभी स्कूलों में ज्यादा से ज्यादा डिजिटल एक्यूमेंट दिए जाएंगे।
  • नई शिक्षा नीति में सभी प्रकार की शैक्षिक विषय वस्तु को प्रमुखता उस क्षेत्र की क्षेत्रीय भाषा में भी ट्रांसलेट किया जाएगा जिससे शैक्षिक क्षेत्र में क्षेत्रीय भाषा को बढ़ावा मिल सके ।
  • छठवीं कक्षा से बच्चों को व्यवसायिक परीक्षण इंटर्नशिप दे दी जाएगी।
  • नई शिक्षा नीति के भीतर अब पढ़ाई में कई प्रकार के अन्य विकल्प बच्चों को दिए जाएंगे। अब दसवीं कक्षा में अन्य विकल्पों को भी रखा जाएगा जिसमें छात्र कोई स्ट्रीम ना चुनकर अपनी इच्छा अनुसार विषयों को चुन सकेगा।
  • नई शिक्षा नीति के अंतर्गत छात्रों को छठवीं कक्षा से ही कोडिंग सिखाई जाएगी।
  • शैक्षिक क्षेत्र में वर्चुअल लैब को भी बनाया जाएगा जिससे शैक्षिक क्षेत्रों की गुणवत्ता को उच्च किया जा सके।
  • नई शिक्षा नीति के तहत वर्षों से चली आ रही 10 + 2 के शैक्षिक पैटर्न को बदलकर 5+3+3+4 के नए शैक्षिक पैटर्न को चुना गया है जिसमें 3 साल की फ्री New Education Policy PDF (NEP) नेशनल एजुकेशन पालिसी 2021 – नई शिक्षा नीति | National education policyस्कूली शिक्षा बच्चों को दी जाएगी।
  • नई शिक्षा नीति के भीतर शिक्षा का सार्वभौमीकरण किया जाएगा जिसमें कुछ शैक्षिक क्षेत्रों को शामिल नहीं किया गया है जैसे मेडिकल तथा लाॅ।

    नई शिक्षा नीति 2021 के मुख्य तथ्य

    • नई शिक्षा नीति के माध्यम से एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट का गठन किया जाएगा जिसमें छात्रों द्वारा परीक्षा में प्राप्त किए गए क्रेडिट को डिजिटल अकैडमी क्रेडिट बनाया जाएगा और विभिन्न उच्च शिक्षा संस्थानों के माध्यम से इन क्रेडिट को संग्रहित कर छात्र के अंतिम वर्ष की डिग्री में स्थानांतरित करके सभी क्रेडिट को एक साथ जोड़ा जाएगा।
    • नेशनल एजुकेशन पालिसी 2020 के अंतर्गत शैक्षिक पाठ्यक्रम को लचीला बनाए जाने की हर संभव कोशिश की जा रही है । यदि कोई छात्र किसी शैक्षिक कोर्स में रुझान ना रखने के कारण उस शैक्षिक कोर्स के बीच में दूसरा कोर्स पढ़ना चाहता है तो वह अपने पहले कोर्स से निश्चित समय अवधि तक रुक कर दूसरा कोर्स ज्वाइन कर सकता है।
    • नई शिक्षा नीति के तहत 2030 तक हर जिले में उच्च शिक्षा संस्थान का निर्माण किया जाना नई शिक्षा नीति के भीतर सम्मिलित है।
    • नई शिक्षा नीति के भीतर 2040 तक सभी उच्च शिक्षा संस्थानों को बहू विषयक शैक्षिक पाठ्यक्रम संस्थान बनाने का उद्देश्य रखा गया है।
    • नई शिक्षा नीति के भीतर स्नातक कोर्स को 3 से 4 साल तक बढ़ा जा सकता है जिसमें छात्रों को बहु विकल्प प्रदान किए जाएंगे। इन सभी बहु विकल्पों के उचित प्रमाण पत्र के अनुसार छात्रों को डिग्री दी जाएगी। उदाहरण यदि कोई छात्र 1 साल के लिए स्नातक कोर्स की पढ़ाई करता है तो उसे केवल एक साल की पढ़ाई का ही प्रमाण पत्र दिया जाएगा और 2 साल बाद उसे एडवांस डिप्लोमा का प्रमाण पत्र दिया जाएगा और 3 साल बाद उचित प्रमाणों के आधार पर उसे डिग्री दी जाएगी अंत में 4 साल के बाद छात्र को बैचलर डिग्री के साथ-साथ रिसर्च की डिग्री भी दी जाएगी।
    • राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी सभी उच्च शिक्षा संस्थानों मैं छात्रों के प्रवेश के लिए सामान्य प्रवेश परीक्षा को आयोजित करेगी जिससे शिक्षा का स्तर बनाया जा सके।
    • नई शिक्षा नीति के तहत सरकारी तथा प्राइवेट संस्थानों को एक समान माना जाएगा।‌
    • नई शिक्षा नीति के तहत भारतीय उच्च शिक्षा आयोग को 4 वर्टिकल दिए गए हैं । जिसमें नेशनल हायर एजुकेशन रेगुलेटरी काउंसिल , हायर एजुकेशनल काउंसिल , जर्नल एजुकेशन काउंसिल तथा नेशनल एक्रीडिटेशन काउंसिल को रखा गया है।
    • ई लर्निंग पर जोर देना ताकि किताबों पर निर्भरता कम हो सके।
    • नई शिक्षा नीति के माध्यम से दिव्यांग जनों के लिए शैक्षिक पाठ्यक्रम में बदलाव किया गया है।


      न्यू एजुकेशन पालिसी 2021 के लाभ

      नेशनल एजुकेशन पालिसी 2021 के माध्यम से लाभार्थियों को कौन-कौन से लाभ प्रदान किये जाएंगे। उन सभी लाभों की सूची लेख में नीचे दी जा रही है। New Education Policy लाभों की पूरी जानकारी नीचे दी गयी सूची से प्राप्त कर सकते हैं।

      • नई शिक्षा नीति के माध्यम से शैक्षिक क्षेत्र में तकनीकी को बढ़ावा दिया जा रहा है।
      • नई शिक्षा नीति के माध्यम से शैक्षिक पाठ्यक्रम में भाषाओं को लेकर कई विकल्प रखे गए हैं। यदि शैक्षिक पाठ्यक्रम में कोई छात्र अपनी क्षेत्रीय भाषा अथवा मातृभाषा को पढ़ना चाहता है तो वह आसानी से उन्हें पड़ सकता है। वही इस शैक्षिक पाठ्यक्रम में भारतीय प्राचीन भाषाओं को पढ़ने का भी विकल्प छात्रों के समक्ष रखा गया है।‌
      • नई शिक्षा नीति में 2025 तक प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा तीन तक के सभी छात्रों के लिए संख्यात्मक ज्ञान तथा साक्षरता को प्राप्त करने के लिए एक राष्ट्रीय मिशन की योजना तैयार की जाएगी।
      • स्वास्थ्य नीति के तहत छात्रों के स्वास्थ्य पर भी ध्यान दिया जाएगा जिसके साथ छात्रों के लिए स्वास्थ्य कार्ड भी बनाये जाएंगे।
      • नई शिक्षा नीति के माध्यम से शिक्षकों को समय-समय पर उनके कार्य प्रदर्शन के आधार पर पदोन्नति को भी रखा गया है।
      • नई शिक्षा नीति में 2030 तक अध्यापन के लिए b.ed की डिग्री को 4 वर्ष की न्यूनतम डिग्री योग्यता में सम्मिलित कर दिया गया है । यानी 2030 तक b.ed का कोर्स 4 साल का हो चुका है।
      • नई शिक्षा नीति के भीतर हायर एजुकेशन से संबंधित एमफिल की डिग्री को भी खत्म किया जा रहा है।
      • राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद वर्ष 2022 तक शिक्षकों के लिए व्यवसायिक मानक को विकसित करेगी तथा एनसीईआरटी के परामर्श पर अध्यापकों की शिक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर शैक्षिक पाठ्यक्रम की चर्चा की विषय वस्तु को भी तैयार किया जाएगा।‌
      • छात्रों को जिस क्षेत्र में अधिक रूचि है जैसे – खेल, कला, बॉक्सिंग, आदि में छात्रों को बढ़ावा दिया जाएगा।
      • नई शिक्षा नीति में शैक्षिक पाठ्यक्रम के साथ-साथ उनके कौशल पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा वही मेन सिलेबस में भी एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज को शामिल किया जा रहा है।
      • छात्रों पर पढ़ाई का बोझ कम करने के लिए हर संभव कोशिश नई शिक्षा नीति में की गई है । जिसमें पढ़ाई को आसान बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल शैक्षिक पाठ्यक्रम में किया जाएगा।‌
      • छात्रों पर बोर्ड परीक्षाओं का बोझ कम करने के लिए बोर्ड परीक्षाओं की रूपरेखा को भी बदला जाएगा जिसमें 1 साल में दो बार छात्रों की परीक्षाएं की जाएंगी।
      • छात्रों को ऑफलाइन कक्षाओं के साथ ऑनलाइन माध्यम से भी पाठ्यक्रम/ कोर्स उपलब्ध करवाए जाएंगे।
      • महाविद्यालयों की स्वायत्ता 15 वर्षों में समाप्त हो जाएगी तथा क्रमिक सहायता प्रदान करने के लिए एक चरणबद्ध प्रणाली की स्थापना भी की जाएगी।
      • देश के बड़े संस्थान जैसे आईआईटी और आईआईएम के लिए वैश्विक स्तर पर मानकों हेतु बहु विषयक शिक्षा एवं अनुसंधान विश्वविद्यालय की स्थापना भी नई शिक्षा नीति के अंतर्गत कराई जाएगी।
      • वहीं कानूनी तथा चिकित्सा क्षेत्र को छोड़कर उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए एक कल निकाय के रूप में भारतीय उच्च शिक्षा आयोग का गठन किया जाएगा।
      • शैक्षिक पाठ्यक्रम का मूल्यांकन करने तथा उसे तकनीकी माध्यम से जोड़ने के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी मंच की एक स्वायत्त निकाय की स्थापना की जाएगी जिससेशिक्षा तथा प्रशासनिक क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से विचारों का आदान प्रदान संभव हो सके।

      नेशनल एजुकेशन पालिसी 2021 के चरण

      नई शिक्षा नीति के चरणों को 4 चरणों में विभाजित किया गया है। पुरानी शिक्षा नीति के 10+2 के फार्मूले को समाप्त करने के बाद सरकार नई शिक्षा नीति को 5+3+3+4 के फार्मूले में लागू करने जा रही है। इस नए फार्मूले के नए पैटर्न में 3 साल की फ्री स्कूली शिक्षा को तथा 12 साल की स्कूली शिक्षा सम्मिलित की गई है। इस फार्मूले को सरकारी तथा गैर सरकारी संस्थानों को फॉलो करना अनिवार्य किया गया है।‌ आइए जानते हैं नई शिक्षा नीति के नए फार्मूले के चार चरणों को …!

      फाउंडेशन स्टेज :- नई शिक्षा नीति के फाउंडेशन स्टेज में 3 से 8 साल तक के बच्चों को सम्मिलित किया गया है। जिसमें 3 साल की प्री स्कूली शिक्षा को सम्मिलित किया गया है जिसके अंतर्गत छात्रों का भाषा कौशल तथा शैक्षिक स्तर का मूल्यांकन किया जाएगा और उसके विकास में ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
      प्रीपेटरी स्टेज :- इस स्टेज में 8 से 11 साल के बच्चों को सम्मिलित किया गया है जिसमें 3 से कक्षा 5 तक के बच्चे होंगे। नई शिक्षा नीति के इस स्टेज में छात्रों का संख्यात्मक कौशल को मजबूत करने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा वहीं सभी बच्चों को क्षेत्रीय भाषा का भी ज्ञान दिया जाएगा।
      मिडिल स्टेज :- इस स्टेज के भीतर छठवीं से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को सम्मिलित किया गया है जिसमें छठवीं कक्षा के बच्चों से से ही कोडिंग सिखाना शुरू की जाएगा । वही सभी बच्चों को व्यवसायिक परीक्षण के साथ-साथ व्यवसाय इंटर्नशिप के अवसर भी प्रदान किए जाएंगे ।
      सेकेंडरी स्टेज : – इस स्टेज में आठवीं कक्षा से 12वीं कक्षा तक के छात्रों को सम्मिलित किया गया है। इस स्टेज के भीतर आठवीं से 12वीं कक्षा के शैक्षिक पाठ्यक्रम को भी खत्म करके बहु वैकल्पिक शैक्षिक पाठ्यक्रम को शुरू किया गया है। छात्र किसी निर्धारित स्ट्रीम के भीतर नहीं बल्कि अपनी मनपसंद के अनुसार अपने विषयों को चुन सकते हैं। नई शिक्षा नीति के अंतर्गत छात्रों को विषयों को चुनने को लेकर स्वतंत्रता दी गई है , छात्र साइंस के विषयों के साथ-साथ आर्ट्स या कॉमर्स के विषय को भी एक साथ पढ़ सकते हैं।

      नई शिक्षा नीति 2021 के अंतर्गत उठाए जाने वाले महत्वपूर्ण कदम

      नई शिक्षा नीति को सुचारू रूप से चलाने के लिए शिक्षकों की भर्तियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। नई शिक्षा नीति के अंतर्गत क्षेत्र तथा मातृ भाषाओं की पढ़ाई को भी सम्मिलित किया गया है जिसके शिक्षकों की कमी चल रही शैक्षिक पाठ्यक्रम के भीतर है। नई शिक्षा नीति के अंतर्गत क्षेत्रीय भाषा बोलने वाले शिक्षकों को भर्ती किया जाएगा।

      माध्यमिक स्तर से ही बच्चों के पास होंगे विदेशी भाषा के कई विकल्प
      नई शिक्षा नीति के भीतर माध्यमिक स्तर से ही बच्चों के पास विदेशी भाषा के कई विकल्पों को रखा जाएगा। जिसमें बच्चे माध्यमिक स्तर से ही फ्रेंच , चाइनीस , जापानीज , स्पेनिश और जर्मन आदि तमाम प्रकार की विदेशी भाषाओं का ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। नई शिक्षा नीति के भीतर भारत की शिक्षा को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने के लिए इस प्रकार के प्रयासों को किया जा रहा है।

      मातृभाषा तथा क्षेत्रीय भाषा को सम्मिलित किया जाएगा शैक्षिक पाठ्यक्रम में
      नई शिक्षा नीति के भीतर मातृभाषा क्षेत्रीय भाषा को भी सम्मिलित किया जाएगा। 2021 की नई शिक्षा नीति के अंतर्गत पांचवी कक्षा तक बच्चों को उनकी मातृभाषा अथवा क्षेत्रीय भाषा पढ़ाने का प्रावधान भी रखा गया है। जिसमें पाठ्य पुस्तकों से लेकर बोलचाल तक क्षेत्रीय भाषाओं को सम्मिलित किया जाएगा। नई शिक्षा नीति के अंतर्गत कक्षा एक से ही बच्चों को दो से तीन प्रकार की भाषाएं सिखाई जाने शुरू की जाएंगी ताकि शिक्षा के बोझ को कम किया जा सके और शिक्षा की गुणवत्ता हर तरह से उच्च की जा सके। यदि पाठ्य पुस्तकों को शैक्षिक भाषा में रूपांतरित किया जाता है तो छात्र उसे आसानी से समझ सकते हैं।

      वोकेशनल पढ़ाई पर मुख्य जोर
      नई शिक्षा नीति के भीतर वोकेशनल पढ़ाई पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है क्योंकि हमारे देश में वोकेशनल पढ़ाई करने वाले छात्रों का प्रतिशत 5 प्रतिशत से भी कम है । नई शिक्षा नीति के भीतर 2025 के अंत तक इस प्रतिशत को 50% तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जिसमें सभी छात्रों को वोकेशनल पढ़ाई कराई जाएगी। वोकेशनल पढ़ाई के भीतर बागवानी , मिट्टी के बर्तनों को बनाना , बिजली का काम और लकड़ी का काम सिखाना आदि कार्य सम्मिलित किए गए हैं। नई शिक्षा नीति के भीतर छठवीं कक्षा से आठवीं कक्षा तक छात्रों को वोकेशनल पढ़ाई कराई जाएगी।

      नए कौशलों को सम्मिलित किया जाएगा शैक्षिक पाठ्यक्रम में
      नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के भीतर छात्रों का पढ़ाई के साथ साथ में कौशलों का विकास भी किया जाएगा। जिसमें न्यूनतम कक्षा से ही बच्चों को योग, संगीत , नृत्य , खेल और मूर्तिकला आदि विषयों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। ताकि छात्र पढ़ाई के साथ साथ अन्य प्रकार के कौशलों में भी निपुण हो पाए।

      नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के माध्यम से छात्रों के लिए निर्णय

      नई शिक्षा नीति के माध्यम से बताया गया है की छात्रों के लिए होमवर्क व स्कूल बैगों का वजन कम किया जाएगा। जो छात्र 1 से 10 की कक्षा में पढ़ते हैं उनके स्कूल बैग का वजन उनके 10 % होना चाहिए। छात्रों को केवल आवश्यक पुस्तकों को ले कर ही विद्यालय जाना होगा। छात्रों के बैग का वजन चेक करने के लिए विद्यालयों में डिजिटल वेइंग मशीन लगाई जाएंगी जिसमे छात्रों के बैग का वजन चेक किया जाएगा। छात्रों को स्कूल बैग लाने में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए।

      National Education Policy syllabus 2021

      नेशनल एजुकेशन पालिसी पाठ्यक्रम में सरकार द्वारा जो जो बदलाव किये गए हैं। उसकी जानकारी लेख में नीचे दी जा रही है। अधिक जानकारी लेख में नीचे दी जा रही है।

      • कक्षा तीसरी से पांचवीं तक के छात्रों को प्रतिदिन 2 घंटे का गृह कार्य दिया जाएगा।
      • कक्षा 6 से 8वीं कक्षा के विद्यार्थियों को 1 घंटे का होम वर्क दिया जाएगा।
      • कक्षा 9 से 12 वीं तक के छात्रों को 2 घंटे का होम वर्क दिया जाएगा।
      • छात्रों का बैग उनके वजन से केवल 10% अधिक होना चाहिए।
      • जो छात्र एलकेजी, यूकेजी में पढ़ते हैं उन्हें कोई होम वर्क नहीं दिया जाएगा।
      • इसके अलावा पहली कक्षा व दूसरी कक्षा में पढ़ने वाले छात्रों को भी गृह कार्य नहीं दिया जाएगा।
      • जब छात्रों के लिए पुस्तकों का चयन किया जाएगा उसके साथ किताबों के वजन पर भी ध्यान दिया जाएगा।
      • छात्रों के लिए स्कूलों में बाथरूम व पानी की सही सुविधा होनी चाहिए।

      नई शिक्षा नीति के स्ट्रीम्स 2021

      नेशनल एजुकेशन पालिसी के तहत छात्रों के पाठ्यक्रम में जो-जो बदलाव किये गए जैसे- शारारिक शिक्षा व पाठ्यक्रम को बढ़ावा दिया जाएगा इसके साथ एकेडमिक स्ट्रीम और वोकेशनल को बांटा नहीं जाएगा। नयी शिक्षा नीति का उद्देश्य छात्रों की की शिक्षा का स्तर को और छात्रों की शैक्षिक क्षमता को बढ़ाना है। इसके साथ अन्य पाठ्यक्रमों को भी नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के अंतर्गत शामिल किया गया है। नई शिक्षा नीति के स्ट्रीम्स की अधिक जानकारी लेख में नीचे दी जा रही है। सभी जानकारियों को उम्मीदवार नीचे दिए गए लेख से प्राप्त कर सकते हैं।

      स्ट्रीम्स का चयन

      नई शिक्षा नीति के तहत के तहत अब छात्र साइंस स्ट्रीम, कॉमर्स स्ट्रीम और आर्ट्स स्ट्रीम में से तीनों स्ट्रीम की पढ़ाई कर सकते हैं अब छात्रों को एक स्ट्रीम का चयन नहीं करना पड़ेगा जिस छात्र का जिस स्ट्रीम में रूचि है वे उसकी पढ़ाई कर सकते हैं। इससे छात्रों को एक स्ट्रीम की पढ़ाई के साथ बाकी स्ट्रीमों की पढ़ाई भी कर सकते हैं।

      शिक्षा के लिए मातृभाषा का प्रयोग

      स्कूलों में छात्रों को पढ़ाने के लिए शिक्षक द्वारा क्षेत्रीय भाषा का प्रयोग होना चाहिए इसके माध्यम से छात्रों को समझने में आसानी होगी। नई शिक्षा नीति के माध्यम से सरकार ने निर्णय लिया की पांचवीं तक के छात्रों की पढ़ाई उनके मातृभाषा में होनी चाहिए। छात्रों को समझने में आसानी हो इसके लिए पाठ्यक्रम को भी क्षेत्रीय भाषा में बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

    • B.Ed अब 4 साल का किया जाएगा

      नेशनल एजुकेशन पालिसी के तहत B.Ed. को 2030 तक 4 साल का कर दिया जाएगा। जिन विश्वविद्यालयों द्वारा इन नियमों का पालन नहीं किया जाएगा सरकार द्वारा उन पर कारवाई की जायेगी। और इसके साथ ऐसे विश्वविद्यालयों से कोर्स करने करने वाले छात्रों को प्राप्त डिग्री मान्य नहीं मानी जायेगी

      वोकेशनल स्टडीज की शुरुआत

      सरकार द्वारा बताया जा रहा है की 2025 तक देश के 50 प्रतिशत छात्रों को वोकेशनल स्टडी करवाई जायेगी। ऐसे बहुत कम छात्र हैं जो वोकेशनल स्टडी करना चाहते हैं। परन्तु इसे अधिक से अधिक छात्रों को प्रदान किया जाएगा। जिसमे ज्यादा ध्यान कक्षा छटवीं से कक्षा आठवीं के छात्रों को रखा जाएगा। और इसके अंतर्गत लकड़ी का काम, बागबानी, मिट्टी के बर्तन बनाने का काम आदि भी रखा जाएगा।

      टीचरों की भर्ती

      शिक्षकों की ज्यादा से ज्यादा भर्ती के लिए भी शिक्षा निति द्वारा बदलाव किया गया है जिसमे अलग-अलग भाषा के लिए शिक्षकों की भर्ती करवाई जायेगी। जिस शिक्षकों का रिटायरमेंट हो चुका है उन टीचरों को भी पुनः पढ़ाने का मौका प्रदान किया जा सकता हैं। जिससे शिक्षा क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा और अधिक से अधिक लोगों को रोजगार की प्राप्ति भी करवाई जायेगी।

      कोरोना के कारण कम किया गया पाठ्यक्रम

      कोरोना वायरस के चलते पढ़ाई में छात्रों को बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ा। इन परेशानियों को देखते हुई छात्रों के लिए 30% सिलेबस को कम कर दिया गया है। छात्रों को परीक्षा में कम किये गए पाठ्यक्रम में से ही प्रश्न पूछे जाएंगे।

      नेशनल एजुकेशन पालिसी 2021 से सम्बंधित प्रश्न उत्तर

      नेशनल एजुकेशन पालिसी 2021 क्या है ?

      नेशनल एजुकेशन पालिसी 2021 को शिक्षा नीति 1986 की जगह पर लागू किया गया है। नई एजुकेशन पालिसी 2020 में 3 साल से 18 साल तक के बच्चों को शिक्षा का अधिकार कानून, 2009 के तहत रखा गया है। नई शिक्षा नीति 2020 के तहत 2030 तक नई शैक्षिक प्रणाली को निश्चित किया गया है और वर्तमान में चल रही 10+2 के मॉडल के स्थान पर पाठ्यक्रम में 5+3+3+4 की शैक्षिक प्रणाली के आधार पर पाठ्यक्रम को विभाजित किया जाएगा। इस नीति का विजन सभी छात्रों को उच्च शिक्षा प्रदान करना है।

      नई शिक्षा नीति 2021 कब लागू होगी ?

      National Education Policy 2021 कब लागू होगी इस बारे में सरकार ने कोई भी अधिकारी बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सरकार द्वारा अधिसूचित होने के बाद नई शिक्षा नीति 2021 लागू हो जाएगी।

      National Education Policy 2021 के चार चरण क्या हैं ?

      फाउंडेशन स्टेज,प्रीपेटरी स्टेज,मिडिल स्टेज,सेकेंडरी स्टेज नई शिक्षा नीति 2021 चार चरण क्या है।

      नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2021 की हिंदी PDF कैसे डाउनलोड करें ?

      नेशनल एजुकेशन पालिसी 2021 की हिंदी पीडीऍफ़ को उम्मीदवार आर्टिकल में दिए गए लिंक के माध्यम से डाउनलोड कर सकते हैं।

      नई शिक्षा नीति में किये गए बदलाव क्या-क्या हैं ?

      शैक्षिक पाठ्यक्रम में नए कौशलों को सम्मिलित किया जाएगा, वोकेशनल पढ़ाई पर मुख्य जोर दिया जाएगा, विदेशी भाषा सिखाई जाने पर भी जोर, मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में शिक्षा प्राप्त, आदि बदलाव किये जाते हैं

      नेशनल एजुकेशन पालिसी 2021 के चरण कौन-कौन से हैं ?

      फाउंडेशन स्टेज के तहत नई शिक्षा नीति के फाउंडेशन स्टेज में 3 से 8 साल तक के बच्चों को सम्मिलित किया जाएगा।
      मिडिल स्टेज में छठवीं से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को सम्मिलित किया जाएगा।
      प्रीपेटरी स्टेज में 8 से 11 साल के बच्चों को सम्मिलित किया जाएगा।
      सेकेंडरी स्टेज में आठवीं कक्षा से 12वीं कक्षा तक के छात्रों को सम्मिलित किया गया।

      क्या छात्र तीनों स्ट्रीमों की पढ़ाई कर सकते हैं ?

      हाँ, नई शिक्षा नीति के तहत छात्र तीन स्ट्रीम साइंस, कॉमर्स, आर्ट्स में से तीनों की पढ़ाई कर सकते हैं।

      कोरोना के चलते शिक्षा विभाग द्वारा छात्रों के कितने प्रतिशत सिलेबस को कम कर दिया गया है ?

      विभाग द्वारा छात्रों के 30 प्रतिशत सिलेबस को कम कर दिया गया है।

Sunday, 5 December 2021

मतदाता जागरूकता सम्बंधित कार्यक्रमों, रैली, चुनाव पाठशाला हेतु स्लोगन

मतदाता जागरूकता सम्बंधित कार्यक्रमों, रैली, चुनाव पाठशाला हेतु स्लोगन 


आओ सब मिलकर गाएँ
हम देने वोट जरूरी जाएँ

देश के मतदाता है
वोट देना आता है

सबका यह अरमान है
करना सब मतदान है

आन बान अरु शान से
सरकार बने मतदान से

उम्र अठारह पूरी है

मत देना बहुत जरूरी है

प्रजातंत्र से नाता है
भारत के मतदाता हैं

सत्य और ईमान से
सरकार बने मतदान से

ई.वी.एम से देंगे वोट
कहते हैं डंके की चोट

आओ मिलकर अलख जगाएँ
शत प्रतिशत मतदान कराएँ

डरने की क्या बात है
पुलिस प्रशासन साथ है

दारू लालच रूपये नोट
नहीं लेंगे है मन का वोट

जागरूक मतदान करेंगें
अपने मन का राज चुनेंगे

बी.एल.ओ. से बात करेंगें
मतदाता हम अवश्य बनेंगे

सबसे बढ़कर दाता है
भारत के मतदाता है

हम अपना कर्तव्य निभाएँगें
सबसे मतदान कराऐंगे

चुनाव आयोग का है आह्वान 
सबको करना है मतदान

एक दो और तीन चार
मतदान का दृढ़ विचार

स्वस्थ जनतंत्र की है पहचान
सबको शिक्षा और मतदान

भारत भाग्य विधाता हूँ
अब तो मैं मतदाता हूँ

अपनी सरकार स्वयं चुनूंगा
मै मतदान जरूर करूंगा

सच्चा योग्य इंसान चुनो
अपने मत से आप चुनो

एक वोट से होय फैसला
मतदाता का यही हौसला

अपनी सबकी जिम्मेदारी है
आम चुनाव की तैयारी है

ई.वी.एम.में नहीं है खोट
बटन दबाओ लगता वोट

हमको यह समझाना है
सबको वोट दिलाना है

कर्तव्यों से कोई न रूठे
किसी का वोट कभी न छूटे

हम सबका ही हो अरमान
सर्वस्व जरूरी हो मतदान

अंतर्मन से देना वोट
बदले मे नही लेना नोट

मतदान हमारा अधिकार है
इससे बनती सरकार है

सरकार बनाना आता है
क्योंकि हम मतदाता है

भारत देश महान है
करते सब मतदान है

चुनाव प्रणाली की जान है
जो करते मतदान है

लोकतंत्र का ज्ञाता है
मतवाला मतदाता है

कभी न मुँह की खाता है
जो सच्चा मतदाता है

अब यही समझ में आता है
सरकार चुने मतदाता है

लोकतंत्र हो तभी महान
सब करे जहाँ मतदान

नागरिकों की है पहचान
सबसे पहले मत का दान

रिश्ते नाते खूब निभाओ
पर पहले मतदान कराओ

सु नागरिक की है पहचान
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Tuesday, 21 September 2021

बैतालपुर ब्लाक में आयोजित किया गया प्रधानाध्यापकों का उन्मुखीकरण कार्यक्रम

बीआरसी अवरा चवरी पर मिशन प्रेरणा के तत्वावधान में बेसिक शिक्षा अधिकारी कि उपस्थिति में प्रधानाध्यापकों का उन्न्मुखिकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया.

कार्यक्रम के प्रारंभ में जिला समन्वयक सामुदायिक शिक्षा डॉक्टर आलोक पांडेय ने प्रधानाध्यापकों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर(DBT) योजना के सुचारू रूप से क्रियान्वयन के बारे में बताया।  डाक्टर पाण्डेय ने अल्पसंख्यक मंत्रालय कि योजनाओं ,आधार केवाईसी अपडेशन,शारदा(स्कूल हर दिन आयें) योजना के बारे में बताया. जिला समन्वयक प्रशिक्षण श्री स्वप्नेश मंगलम ने दीक्षा ऐप पर होने वाले प्रशिक्षण एवं दीक्षा ऐप का कक्षा में उपयोग के बारे में बताते हुए शनिवार को होने वाली क्विज में सहभागिता बढ़ाने की बात कही। एसआरजी आदित्य नारायण गुप्ता ने प्रधानाध्यापकों को कोरोना के बाद चुनौतीपूर्ण सत्र में कैसे शिक्षण किया जाए इस ओर विमर्श किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी श्री संतोष राय ने प्रधानाध्यापकों से कायाकल्प के 19 पैरामीटर्स,आधार नामांकन,उत्कृष्ट विद्यालयों की सूची,पुस्तक वितरण,पेंडिंग लीव,बाल गणना आदि पर विस्तार पूर्वक विमर्श करते हुए समस्त प्रधानाध्यापकों को इन बिंदुओं पर विशेष ध्यान देने की बात कही।

इससे पूर्व कार्यक्रम में खण्ड शिक्षा अधिकारी नवनीत चौबे, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के के अध्यक्ष श्री संजय मिश्र, ब्लाक मंत्री एवं जनपदीय कोषाध्यक्ष जी प्रकाश मणि त्रिपाठी,जूनियर शिक्षक संघ की जिलाध्यक्ष श्रीमती हेमा त्रिपाठी, जूनियर शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष विनोद सिंह, ब्लाक अध्यक्ष श्री के०एन० सिंह ने बेसिक शिक्षा अधिकारी को स्मृति चिन्ह देकर एवं माला पहनाकर स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष श्री संजय मिश्रा ने किया। कार्यक्रम के समापन पर खण्ड शिक्षा अधिकारी श्री नवनीत चौबे ने समस्त आगंतुकों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए बीआरसी अवरा चौरी के समस्त स्टाफ, कंप्यूटर आपरेटर श्री विजय प्रताप एवं सहायक लेखाकार श्री बृजेश मणि त्रिपाठी, अभय मणि ,अमित,सतीश एवं प्रदीप को सक्रिय सहयोग हेतु धन्यवाद देते हुए भविष्य की ब्लाकस्तरीय कार्ययोजना के ससमय क्रियान्वयन हेतु आवश्यक निर्देश दिए।। 

Thursday, 26 August 2021

चुनाव पाठशाला के उद्देश्य (Objective of Chunaw Pathshala)

 चुनाव पाठशाला के उद्देश्य इस प्रकार हैं-   

1 व्यवहारिक अनुभवों के जरिये लक्ष्य समूह को मतदाता पंजीकरण, चुनावी प्रक्रिया और इससे जुड़े दूसरे विषयों के बारे में जानकारी देना;

2 प्रतिभागियों को ई.वी.एम. और वी.पी.पैट, से परिचित कराना । उन्हें यह बताना कि ई.वी.एम. मजबूत व्यवस्था है और इसके जरिये चुनावी प्रक्रिया पूरी ईमानदारी से निभाई जाती है,

3. लक्ष्य समूह को उनके वोट की कीमत बताना, और वे अपने मत देने के अधिकार का बिना किसी दबाव के. पूरे भरोसे से और पूरी नैतिकता के साथ प्रयोग कर सकें, इसमें उनकी मदद करना;

4  चुनावी साक्षरता क्लब के सदस्यों की क्षमता का समाज में चुनावी साक्षरता का प्रसार करने के लिए इस्तेमाल करना;

5 उन सभी सदस्यों का मतदाता के रूप में पंजीकरण कराना, जो उपयुक्त होते हुए भी अभी तक पंजीकृत नहीं हो पाए हैं; और

6 ऐसी सोच व समझ विकसित करना कि ज्यादा से ज्यादा लोग चुनाव प्रक्रिया में भागीदारी निभाएँ और नैतिक तरीके से मतदान करें। साथ ही, इस सिद्धान्त का पालन करें कि 'हर वोट महत्त्वपूर्ण और 'कोई मतदाता न छूटे |


चुनाव पाठशाला बनाने का तरीका, सदस्य और प्रतिभागी
चुनाव पाठशाला का परिचय

चुनाव पाठशाला बनाने का तरीका, सदस्य और प्रतिभागी (Members of Chunaw Pathshala)

चुनाव पाठशाला का नाम चुनाव केन्द्र के नाम पर रखा जा सकता है। इसे बूथ लेवल ऑफिसर (बी.एल.ओ.) सम्बंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक के सहयोग से बनाएँगे और वे ही इस चलाएँगे भी। बी.एल.ओ. एवं सम्बंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक की यह जिम्मेदारी होगी कि वे चुनाव पाठशाला के बारे में लोगों को जागरूक करें,लोगों को इसमें शामिल होने के लिए तैयार करें और एक ऐसी निश्चित जगह का इन्तजाम करेंजहाँ पर चुनाव पाठशाला चलाई जा सके।चुनाव पाठशाला सबके लिए खुली होगी। पर इसमें नीचे लिखे समूह शामिल होंगे -

1 भविष्य के वे मतदाताजो 14 से 17 साल की उम्र के हैं और बीच में ही स्कूल छोड़ चुके हैं

18-19 साल की उम्र के नए मतदाता

3  महिलाएँ (युवा और प्रौढ़)

वरिष्ठ नागरिक

दिव्यांग जन (अगर कोई हों)

14 साल से कम उम्र के वे बच्चेजो स्कूल नहीं जाते

क्षेत्र विशेष के अन्य समूह (उदाहरण के लिए- जनजाति के लोग)

सदस्यों का नामांकन चुनाव पाठशाला सदस्यों और सम्बंधित सरकारी कर्मचारियों के अलावा गैर राजनीतिक सी.एस. ओ. और स्वयंसेवकों की मदद से किया जाएगा। नामांकन के लिए अध्यापकोंराष्ट्रीय साक्षरता मिशन (एन.एल.एम.) के कार्यकर्ताओंक्षेत्र के मतदान केन्द्र की पंचायत या नगर निकाय के कार्यकर्ताओं (जो निर्वाचित न हों) की स्वैच्छिक मदद ली जा सकती है।

बूथ लेवल अधिकारी (बी.एल.ओ.), संयोजक/प्रधानाध्यापक  सदस्यता का रजिस्टर तैयार करेंगे। यह रजिस्टर तैयार करना जरूरी होगा। वे हर तिमाही में जिला चुनाव अधिकारी को सदस्यता के सम्बन्ध में रिपोर्ट भेजें. रजिस्टर को अद्यतन (जिसमें अब तक की सारी जानकारियाँ दी गई हों) बनाए रखा जाना चाहिए और हर तिमाही  के अन्त में इस पर बी.एल.ओ. और संयोजक द्वारा हस्ताक्षर किए जाने चाहिए। नोडल अधिकारी के रूप में बी एल ओ तैयार करना जरूरी होगा। वे हर तिमाही में जिला चुनाव अधिकारी को सदस्यता के सम्बन्ध में रिपोर्ट भेजेंगे।

5. नोडल अधिकारी के रूप में बी.एल. ओ. अपने-अपने क्षेत्र के निर्वाचन साक्षरता क्लबों के नोडल अधिकारी के रूप में काम करेंगे। चुनाव पाठशाला सदस्य निर्वाचन साक्षरता क्लब का सहयोग करेगा और उनका मार्गदर्शन करेगा। यह सदस्य निर्वाचन साक्षरता क्लब को क्रियाशील बनाने और सदस्यों का नामांकन कराने में बी.एल.ओ. की मदद भी करेगा।

6. संयोजक

बी.एल.ओ. समुदाय में से ही निर्वाचन साक्षरता क्लब के लिए संयोजक की पहचान करेंगे। राष्ट्रीय साक्षरता मिशन के स्वयंसेवक शिक्षकों और प्रेरकों को इसमें वरीयता दी जा सकती है। चुनाव पाठशाला सदस्यों राष्ट्रीय सेवा योजना (एन.एस.एस.)नेहरू युवा केन्द्र संगठन (एन.वाई के एस) के युवा सदस्यों को इसमें बारी-बारी से संयोजक बनाया जा सकता है। इन्हें एक मास्टर ट्रेनर द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में निर्वाचन साक्षरता समूह बनाने से पहले एक काम किया जाना जरूरी हैवह है-संयोजकों की पहचान और उनका प्रशिक्षण ।

बी.एल.ओ. खुद भी पाठशाला के संयोजक के रूप में काम कर सकते हैं। यह राज्य सरकार को तय करना है कि संयोजक कोई स्वयंसेवक होगा अथवा बी.एल.ओ. स्वयं ।संयोजक को मतदाता प्रशिक्षक कहा जाएगा। मतदाता प्रशिक्षक का काम होगा-सारी गतिविधियों का अध्ययन करके उन्हें पूरी दक्षता के साथ चुनाव पाठशाला में आयोजित करना। इसके लिए प्रशिक्षक को विशेष प्रयास व तैयारी करनी होगी। प्रशिक्षक. बी.एल.ओ. की मदद से लोगों की समस्याओं और मुद्दों की पहचान करेंगे और उनकी शंकाओं का समाधान करेंगे। साथ हीप्रतिभागियों से मिलने वाले फीडबैक और सुझावों पर विचार करके उस विषय पर अपना सुझाव देंगे। मतदाता प्रशिक्षक को पंजीकरणमतदाता सूची और मतदान प्रक्रिया का अच्छा ज्ञान/जानकारी होनी चाहिए।

 

उपरोक्त चुनाव पाठशाला के दिए गए फार्मेट में जिस प्रकार के सदस्य/मतदाता  मिलते जाएँ उनके नाम रजिस्टर में जोड़ते रहें. 


चुनाव पाठशाला का परिचय
चुनाव पाठशालाऒं के उद्देश्य 

चुनाव पाठशाला का परिचय (Introduction to Chunaw Pathshala)

हमारे देश में निर्वाचन साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए निर्वाचन साक्षरता क्लब बनाए जा रहे हैं। वे क्लब हर उम्र के लोगों को चुनावी साक्षरता देने के लिए काम करेंगे। खासतौर से भविष्य के मतदाता और युवा मतदाता इसके दायरे में आएँगे। ये क्लब ऐसी गतिविधियों के जरिये निर्वाचन साक्षरता देंगे, जो रोचक और मनोरंजक होंगी। इनका निर्वाचन साक्षरता देने का तरीका व्यवहारिक अनुभवों पर आधारित होगा। यह सारा काम निष्पक्ष तरीके से तटस्थ रहकर किया जाएगा। तटस्थ यानी किसी भी पक्ष में शामिल हुए बिना । उन लोगों के लिए, जो औपचारिक शिक्षा से नहीं जुड़े हैं, मतदान केन्द्र के स्तर पर निर्वाचन साक्षरता क्लब बनाए जाएँगे। ये क्लब चुनाव पाठशाला' के रूप में बनाए जाएंगे। चुनाव पाठशाला मतदान केन्द्र के स्तर पर बनेगी, और गाँव/समुदाय के सभी सदस्यों के लिए होगी। इसमें उन युवाओं पर खास ध्यान दिया जाएगा, जिन्होंने बीच में ही स्कूली पढ़ाई छोड़ दी है। इसके साथ-साथ गाँव के दूसरे सभी वर्गों की भी इसमें भागीदारी होगी। चूंकि इसमें सभी उम्र के लोग शामिल होंगे, इसलिए यह जरूरी है कि जो भी गतिविधियों की जाएँ, आसान हों और सभी सदस्य इसमें भागीदारी निभाएँ। शहरी क्षेत्रों में भी इसका संचालन इसी तरह किया जाएगा।

चुनाव पाठशाला बनाने का तरीका, सदस्य और प्रतिभागी
चुनाव पाठशालाऒं के उद्देश्य