Sunday, 21 May 2017

शिक्षा को नया आयाम देने में जुटे आशुतोष : अमर उजाला

प्राथमिक विद्यालय सोनबह के अध्यापक आशुतोष नाथ तिवारी के प्राथमिक पाठ्यक्रम को आनलाइन करने के प्रयास को अमरउजाला अखबार ने प्राथमिकता से जगह दिया...



Saturday, 13 May 2017

शिक्षा को नया आयाम देने में जुटे आशुतोष -अमर उजाला


शिक्षा को नया आयाम देने में जुटे आशुतोष -अमर उजाला दिनांक-
विषय- शिक्षा में संचार तकनिकी का उपयोग
13 May 2017



Friday, 14 April 2017

चन्दन है इस देश की माटी, तपोभूमि हर ग्राम है(chandan hai is desh ki mati)

चन्दन है इस देश की माटी, तपोभूमि हर ग्राम है।
हर बाला देवी की प्रतिमा, बच्चा-बच्चा राम है ॥
हर शरीर मन्दिर सा पावन, हर मानव उपकारी है।
जहाँ सिंह बन गये खिलौने, गाय जहाँ मा प्यारी है।
जहाँ सवेरा शंख बजाता, लोरी गाती शाम है।
हर बाला देवी की प्रतिमा, बच्चा-बच्चा राम है ॥
जहाँ कर्म से भाग्य बदलते, श्रम निष्ठा कल्याणी है।
त्याग और तप की गाथाएँ, गाती कवि की वाणी है ॥
ज्ञान जहाँ का गंगा जल सा, निर्मल है अविराम है।
हर बाला देवी की प्रतिमा, बच्चा-बच्चा राम है ॥
इसके सैनिक समर भूमि में, गाया करते गीता हैं।
जहाँ खेत में हल के नीचे, खेला करती सीता हैं।
जीवन का आदर्श यहाँ पर, परमेश्वर का धाम है।
हर बाला देवी की प्रतिमा, बच्चा-बच्चा राम है ॥
चन्दन है इस देश की माटी, तपोभूमि हर ग्राम है।
हर बाला देवी की प्रतिमा, बच्चा-बच्चा राम है ॥

Friday, 7 April 2017

उत्तरप्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में योग एवं ध्यान की अनिवार्यता

ऐसी सूचना है की उत्तर प्रदेश के विद्यालयों में ध्यान एवं योग को अनिवार्य किया जायेगा.. यह जानकार अत्यंत प्रसन्नता हुई .योग एवं ध्यान से से छात्रों के दैनिक जीवनचर्या में अनेको लाभ हैं..
●योग एवं ध्यान छात्रों की एकाग्रता बढाता है।
●योग मन को शक्तिशाली बनाता है...
●मस्तिष्क को शक्तिशाली बनाता है..
●आत्मविश्वास में वृद्धि
●अधिक केन्द्रित व स्पष्ट मन
●बेहतर स्वास्थ्य
●बेहतर मानसिक शक्ति एवं ऊर्जा अधिक गतिशीलता

प्राथमिक विद्यालय सोनबह के बच्चों को नित्य सुबह कक्षाएं प्रारंभ करने से पूर्व "निर्वाण षटकम- शिवोहम" के माध्यम से ध्यान एवं योग से जोड़ने का एक प्रयास पिछले 6 माह से हो रहा है . माननीय अखिलेश यादव जी के मुख्यमंत्रित्व काल में भी ये कार्य अनवरत चलता था और अब नई सरकार द्वारा योग को प्राथमिकता देने से स्थितियां अपेक्षाकृत और भी अच्छी होंगी..
सुबह का 5 मिनट का ध्यान (चाहे वो बच्चे किसी श्लोक,प्रार्थना,योगमुद्रा या ॐ के उच्चारण किसी भी स्वीकार्य मध्यम से करें ) बच्चों की स्मरणशक्ति,उनके तर्कक्षमता एवं विषय पर ध्यान केन्द्रित करने की क्षमता में अप्रत्याशित परिवर्तन लाता है ..
उत्तर प्रदेश सरकार को योग को पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए कोटिशः धन्यवाद .. वीडियो: निर्वाण षटकम- शिवोहम (प्राथमिक विद्यालय सोनबह,रुद्रपुर देवरिया)


Wednesday, 5 April 2017

दिनांक 1 अप्रैल 2017 को प्राथमिक विद्यालय सोनबह में नवीन शिक्षण सत्र के प्रथम दिवस के अवसर पर विद्यालय के समस्त अध्यापक,कर्मचारी एवं छात्र छात्राओं ने सत्र का प्रारंभ सरस्वती वंदना मन्त्र "या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता..." के साथ किया गया..आरती के पश्चात समस्त अध्यापको छात्रों एवं कर्मचारियों ने माँ सरस्वती की प्रतिमा के साथ साथ अन्य महापुरुषों के तस्वीर पर पुष्प अर्पित किया..पठन पाठन प्रारम्भ करने से पूर्व विद्यालय के समस्त छात्र छात्राओं का तिलक लगाकर अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर सभी छात्र छात्राओं एवं अध्यापकों ने अनुशासन और स्वच्छता की शपथ ली.


आशुतोष की कलम से

Wednesday, 29 March 2017

नव वर्ष विक्रम संवत 2074 एवं चैत्र नवरात्रि की शुभकामनायें


वर्तमान परिवेश में पश्चिम का अन्धानुकरण करते हुए हम 31दिसम्बर की रात को कडकडाती हुए ठण्ड में नव वर्ष काँप काँप कर मानतें है..पटाके फोड़ते है,मिठाइयाँ बाटते हैं और शुभकामना सन्देश भेजते है..कहीं कहीं मास मदिरा तामसी भोजन का प्रावधान भी होता है..अश्लील नृत्य इत्यादि इत्यादि फिर भी हमें ये युक्तिसंगत लगता है. विश्व में हजारों सभ्यताएं हुई हैं और हजारों पद्धतियाँ है सबकी अपनी अपनी..... शायद ३१ दिसम्बर की रात या १ जनवरी को नव वर्ष मनाने का कोई वैज्ञानिक आधार हो, मगर मैंने आज तक नहीं देखा... फिर भी ये उनकी अपनी पद्धति है, मगर हम क्यूँ गुलाम मानसिकता का प्रदर्शन करते हैं..विडंबना ये है की क्या कभी आप ने किसी अमेरिकी को हिन्दू नव वर्ष मनाते देखा है..
मैं ये कहना जरुरी समझता हूँ की १ जनवरी को कुछ भी वैज्ञानिक दृष्टि से नवीन नहीं होता मगर फिर भी नव वर्ष होता है..



भारतीय नव वर्ष कब मनाया जाता है : हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल प्रतिपदा के प्रथम दिन हिन्दू नव वर्ष मनाया जाता है..ऐसी मान्यता है की सतयुग का प्रथम दिन भी इसी दिन शुरू हुआ था..एक अन्य मान्यता के अनुसार ब्रम्हा ने इसी दिन सृष्टि का सृजन शुरू किया था..भारत के कई हिस्सों में गुडी पड़वा या उगादी पर्व मनाया जाता है.इस दिन घरों को हरे पत्तों से सजाया जाता है और हरियाली चारो और दृष्टीगोचर होती है.
इस वर्ष पश्चिमी कलेंडर के अनुसार ये वर्ष 29 मार्च 2017 को शुरू होगा..चलिए ये तो रही मान्यताएं और इतिहास की बातें अब कुछ वैज्ञानिक तथ्यों को भी जान लें..

भारतीय नव  वर्ष के वैज्ञानिक तथ्य:

१ चैत्र माह मतलब हिन्दू नव वर्ष के शुरू होते ही रातें छोटी और दिन बड़े होने लगते है..
२ पेड़ों पर नवीन पत्तियों और कोपलों का आगमन होता है..पतझड़ ख़तम होता है और बसंत की शुरुवात होती है..
३ प्रकृति में हर जगह हरियाली छाई होती है प्रकृति का नवश्रृंगार होता है..
४ धर्म को मानने वाले लोग पूजा पाठ करते है मंदिर जातें है नदी स्नान करतें है..
५ भास्कराचार्य ने इसी दिन को आधार रखते हुए गड़ना कर पंचांग की रचना की।

आप ही सोचे क्या जनवरी के माह में ये नवीनता होती है नहीं तो फिर नव वर्ष कैसा..शायद किसी और देश में जनवरी में बसंत आता हो तो वो जनवरी में नव वर्ष हम क्यूँ मनाये ....
चलिए आप सभी को नव वर्ष की ढेरों शुभकामनायें आशा करूँगा की ये नव वर्ष आप सभी के जीवन में अपार हर्ष और खुशहाली ले कर आये.. जाते जाते एक जानकारी के साथ छोड़ जाता हूँ भारतीय पंचांग के महीनो के नाम और पश्चिम में कैलेंडर में उस माह का अनुवाद
चैत्र--- मार्च-अप्रैल
वैशाख--- अप्रैल-मई
ज्येष्ठ---- मई-जून
आषाढ--- जून-जुलाई
श्रावण--- जुलाई - अगस्त
भाद्रपद--- अगस्त -सितम्बर
अश्विन्--- सितम्बर-अक्टूबर
कार्तिक--- अक्टूबर-नवम्बर
मार्गशीर्ष-- नवम्बर-दिसम्बर
पौष----- दिसम्बर -जनवरी
माघ---- जनवरी -फ़रवरी
फाल्गुन-- फ़रवरी-मार्च