Tuesday, 15 August 2017

आशुतोष को गणतंत्र दिवस पर मिला जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक द्वारा उत्कृष्ट शिक्षक का सम्मान

श्री आशुतोष नाथ तिवारी को गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2017) के अवसर पर शिक्षा में उत्कृष्ट योगदान हेतु, जिलाधिकारी श्रीमती अनीता श्रीवास्तव,पुलिस अधीक्षक मोहम्मद इमरान एवं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी श्री राजीव यादव ने प्रशस्ति पत्र और मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया ..
ज्ञातव्य हो की श्री आशुतोष नाथ तिवारी ने बेसिक शिक्षा परिषद् में नौकरी शुरू करने के 4 माह में ही यह पुरस्कार प्राप्त किया है.  शिक्षा अधिकारी श्री राजीव यादव ने कहा की यह उपलब्धि श्री आशुतोष नाथ तिवारी के शिक्षा और छात्रों के प्रति समर्पण की द्योतक है ..


            
                           







प्राथमिक विद्यालय सोनबह के समस्त अध्यापकगण एवं कर्मचारियों की तरफ से स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनायें

आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। आइये नमन करें उन साढ़े चार लाख क्रांतिकारी वीरों को जिन्होंने हमारे इस "स्वर्णिम भविष्य" के लिए अपना वर्तमान,अपना जीवन, "वंदे मातरम" और "भारत माता की जय" के उदघोष के साथ, स्वतंत्रता की बलिवेदी में होम कर दिया.
मगर एक विचारणीय प्रश्न ये है कि हम कितने स्वतंत्र हैं,गुलाम भारत में कभी भगत सिंह, पंडित बिस्मिल और अशफाक उल्ला खान की आजादी का घोष "वंदेमातरम" "भारत माता की जय", अंग्रेजो को स्वीकार नही था इसलिए उन्हें फांसी दे दी गई..
मगर आज हम स्वतंत्र है..स्वतंत्रता की 71वी वर्षगांठ मना रहे हैं . 70 साल में अशफाक उल्ला खान का "बन्दे मातरम" साम्प्रदायिक हो चुका है, सावरकर और भगत सिंह की "भारत माता" का जयकारा विवादित हो चुका है..और "भारत तेरे टुकड़े होंगे......" के नारे वर्तमान भारत की आधुनिक बुद्धजीविता के मानदंड बन गए???
यक्ष प्रश्न ये है कि, क्या हम फिर बौद्धिक गुलामी की ओर जा रहे हैं?? क्या भारत का जनतंत्र मर रहा है?? क्या इसी भारत की कल्पना की थी फाँसी पर झूलते समय हमारे अमर बलिदानियों ने???
खैर आज ये प्रश्न या विवेचना का दिन नही,आज दिन है जश्न मनाने का,आत्मबोध का...बाधाएँ आती है, आगे भी आते रहेंगी..कलयुग के समुंद्र मंथन का समय है, विष भी निकलेगा।।। 15 अगस्त हमारे उम्मीद,विश्वास और आस्था का दिन है । विश्वगुरु भारत के प्राचीन गौरव को पुनर्स्थापित करने के संकल्प लेने का दिन है..आइये हम सब प्रण लें की अपने मूल अधिकारों के साथ, कर्तव्यों का भी निर्वहन करते हुए "विश्वगुरु भारत" की पुनर्स्थापना में अपना योगदान सुनिश्चित करेंगे...
आप सभी को एक बार पुनः स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं.
जय हिंद, भारत माता की जय..
प्राथमिक विद्यालय सोनबह के समस्त अध्यापक एवं कर्मचारियों की तरफ से स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनायें 
आशुतोष की कलम से

Thursday, 10 August 2017

Drawing Work By students

Sketching is almost everything. It is the painter's identity, his style, his conviction, and then color is just a gift to the drawing.
(Pics: Primary School Sonbah,Rudrapur Deoria..)








 

Monday, 7 August 2017

प्राथमिक विद्यालय सोनबह- रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं..

रक्षाबन्धन भारत का एक प्रमुख त्योहार है, जो प्रतिवर्ष श्रावणमास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।
श्रावण (सावन) में मनाये जाने के कारण इसे श्रावणी (सावनी) या सलूनो भी कहते हैं।रक्षाबन्धन में राखी या रक्षासूत्र का सबसे अधिक महत्त्व है। राखी कच्चे सूत जैसे सस्ती वस्तु से लेकर रंगीन कलावे, रेशमी धागे, तथा सोने या चाँदी जैसी मँहगी वस्तु तक की हो सकती है। राखी सामान्यतः बहनें भाई को ही बाँधती हैं परन्तु ब्राह्मणों, गुरुओं और परिवार में छोटी लड़कियों द्वारा सम्मानित सम्बंधियों (जैसे पुत्री द्वारा पिता को) भी बाँधी जाती है। कभी-कभी सार्वजनिक रूप से किसी नेता या प्रतिष्ठित व्यक्ति को भी राखी बाँधी जाती है। 
अब तो प्रकृति संरक्षण हेतु वृक्षों को राखी बाँधने की परम्परा भी प्रारम्भ हो गयी है। हिन्दुस्तान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघके पुरुष सदस्य परस्पर भाईचारे के लिये एक दूसरे को भगवा रंग की राखी बाँधते हैं। हिन्दू धर्म के सभी धार्मिक अनुष्ठानों में रक्षासूत्र बाँधते समय कर्मकाण्डी पण्डित या आचार्य संस्कृत में एक श्लोक का उच्चारण करते हैं, जिसमें रक्षाबन्धन का सम्बन्ध राजा बलि से स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होता है। भविष्यपुराण के अनुसार इन्द्राणी द्वारा निर्मित रक्षासूत्र को देवगुरु बृहस्पति ने इन्द्र के हाथों बांधते हुए निम्नलिखित स्वस्तिवाचन किया (यह श्लोक रक्षाबन्धन का अभीष्ट मन्त्र है)-
येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल ॥
इस श्लोक का हिन्दी भावार्थ है- "जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बाँधा गया था, उसी सूत्र से मैं तुझे बाँधता हूँ। हे रक्षे (राखी)! तुम अडिग रहना (तू अपने संकल्प से कभी भी विचलित न हो।)"

प्राथमिक विद्यालय सोनबह के समस्त अध्यापकगण एवं कर्मचारियों की तरफ से आप सभी को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं...

Thursday, 27 July 2017

नागपंचमी की शुभकामनाएं

नागपंचमी का पावन त्योहार सबके लिए मंगलकारी हो॥

         🌻 नागपंचमी अर्थात अंधकार में प्रकाश की सम्भावना।  नागों से भी यह शिक्षा लेना चाहिए कि जब तक नागदेवता को आप छेडेगे नही, तकलीफ नही देगे तक तक आपको कोंई क्षति नही पहुचायेगे ,जिस तरह भोलेनाथ प्राणी मात्र के कल्याण के लिए जहर पीकर देव से महादेव बन गए उसी प्रकार हमें भी समाज में व्याप्त निंदा, अपयश, उपेक्षा,और आलोचना रुपी जहर को पीकर मानव से महामानव बनना होगा।
        🌻भगवान् शिव का एक नाम आशुतोष भी है। जल धारा चढ़ाने मात्र से प्रसन्न होने वाले आशुतोष भगवान् शिव का यही सन्देश है कि आपको अपने जीवन में जो कुछ भी और जितना भी प्राप्त होता है, उसी में प्रसन्न और सन्तुष्ट रहना सीखें।
      🌻आओ इस महापर्व को सार्थक बनायें। भगवान् शिव के चरणों में प्रणाम करते हुए अपनी बुराइयों को दूर करने का व्रत हम सब लें ॥ क्योंकि - श्रावण में शिवजी का पूजन करते हुए बिचार करें। शिव होने का अर्थ है, एक ऐसा जीवन जो मैं और मेरे से ऊपर जिया गया हो। जहाँ जीवन तो है मगर जीवन के प्रति आसक्ति नहीं ,और जहाँ रिश्ते तो हैं ,मगर किसी के भी प्रति राग और द्वेष नहीं।
      🌻जहाँ प्रेम तो है मगर मोह नहीं और जहाँ अपनापन तो है मगर मेरापन नहीं। जहाँ ऐश्वर्य तो है मगर विलास नहीं ,और जहाँ साक्षात माँ अन्नपूर्णा है मगर भोग नहीं। जहाँ नृत्य भी है, संगीत भी है, त्याग भी है और योग भी है मगर अभिमान नहीं।
         🌻मित्रों पौराणिक कथाओं के आधार पर भगवान शेषनाग बनकर पूरी तरह से हमारी रक्षा का दायित्व लिया है ,यह पृथ्वी सहस्र फनों पर टिकी हुई है ,भगवान विष्णु क्षीरसागर पर सोते है ,शिवजी के गले मे नागों का ही हार है ,राजा जनमेजय ने अपने पिता के मृत्यु का बदला लेने के लिए सर्पयज्ञ कराया था जिसे ,आस्तीक मुनि ने ही  पंचमी के दिन सर्पयज्ञ बंद करबाया था, जिससे यह त्यौहार बडी धूम धाम से मनाया जाता है ,समुद्र मंथन के समय  भी कालिया नाग को रस्सी बनाकर मथने का कार्य किया इस कारण दुष्ट व्यक्ति मे भी उपकार की भावना धर्म की भावना जागृति हो जाय तो वो भी पूजनीय बन जाता है ऐसा महापुरुषों का कथन है
              🌻अतः इस त्योहार मे हम नागों की पूजा करते है नागकेसर बारह नामो से उनकी पूजा करते है ,धृतराष्ट्र ,कर्कोटक अश्वतर,शंखपाल ,पद्म ,कम्बल ,अनंत ,शेष ,वासुकी ,पागल्भ,तक्षक और कलिया इन नामो से पूजन करने से भगवान शिव तो प्रसन्न ही होते है साथ ही साथ नाग देवता भी हमे आक्षुण्य लाभ प्राप्त की प्राप्ति होती है ,धन यश,कीर्ति ,व्यापार आदि चीजो मे तरक्की होती है ऐसा शास्त्रो का मत है ॥
     🌻अतः जीवन कीहर परिस्थिति मे , और जब हम विषमता में भी जीना सीख जाएँ, जब हम निर्लिप्त रह कर बांटकर खाना सीख जाएँ और जब हम काम की जगह राम में जीना सीख जाएँ, वास्तव में शिव हो जाना ही है। नागपंचमी का त्योहार हमारे लिए पूर्णतया कल्याणकारी सावित होगा ।अतः यह त्योहार सभी के लिए कल्याणकारी हो ,धन धान्यकारी हो ॥

 लेखक: आचार्य भूपेन्द्र मिश्र

Sunday, 9 July 2017

सावन का शुभारंभ...

सावन का महीना और चारों और हरियाली। भारतीय वातावरण में इससे अच्छा कोई और मौसम नहीं बताया गया है। जुलाई आखिर या अगस्त में आने वाले इस मौसम में, ना बहुत अधिक गर्मी होती है और ना ही बहुत ज्यादा सर्दी। वातावरण को अगर एक बार को भूला भी दिया जाए, किन्तु अपने आध्यात्मिक पहलू के कारण सावन के महीने का हिन्दू धर्म में विशेष महत्त्व बताया गया है। सावन का महीना पूरी तरह से भगवान शिव को समर्पित रहता है। इस माह में विधि पूर्वक शिवजी की आराधना करने से, मनुष्य को शुभ फल भी प्राप्त होते हैं।
इस माह में भगवान शिव के 'रुद्राभिषेक' का विशेष महत्त्व है। इसलिए इस माह में, खासतौर पर सोमवार के दिन  'रुद्राभिषेक' करने से शिव भगवान की कृपा प्राप्त की जा सकती है। अभिषेक कराने के बाद बेलपत्र, शमीपत्र, कुशा तथा दूब आदि से शिवजी को प्रसन्न करते हैं और अंत में भांग, धतूरा तथा श्रीफल भोलेनाथ को भोग के रूप में समर्पित किया जाता है।
सावन की पौराणिक कथा
सावन माह के बारे में एक पौराणिक कथा है कि- "जब सनत कुमारों ने भगवान शिव से सावन महीना प्रिय होने का कारण पूछा तो भगवान भोलेनाथ ने बताया कि “जब देवी सती ने अपने पिता दक्ष के घर में योगशक्ति से शरीर त्याग किया था, उससे पहले देवी सती ने महादेव को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण किया था। अपने दूसरे जन्म में देवी सती ने पार्वती के नाम से हिमाचल और रानी मैना के घर में पुत्री के रूप में जन्म लिया। पार्वती ने युवावस्था के सावन महीने में निराहार रह कर कठोर व्रत किया और शिव को प्रसन्न कर उनसे विवाह किया, जिसके बाद ही महादेव के लिए यह विशेष हो गया”।
वैसे सावन की महत्ता को दर्शाने के लिए और भी अन्य कई कहानी बताई गयी हैं जैसे कि मरकंडू ऋषि के पुत्र मारकण्डेय ने लंबी आयु के लिए सावन माह में ही घोर तप कर शिव की कृपा प्राप्त की थी।
कुछ कथाओं में वर्णन आता है कि इसी सावन महीने में समुद्र मंथन किया गया था। मंथन के बाद जो विष निकला, उसे भगवान शंकर ने पीकर सृष्टि की रक्षा की थी।
किन्तु कहानी चाहे जो भी हो, बस सावन महीना पूरी तरह से भगवान शिव जी की आराधना का महीना माना जाता है। यदि एक व्यक्ति पूरे विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करता है, तो यह सभी प्रकार के दुखों और चिंताओं से मुक्ति प्राप्त करता है।
सावन के सोमवार से प्रसन्न हो जाते हैं शिव भगवान
सावन महीने के प्रत्येक सोमवार को शिव की पूजा करनी चाहिए। इस दिन व्रत रखने और भगवान शिव के ध्यान से विशेष लाभ प्राप्त किया जा सकता है। यह व्रत भगवान शिव की प्रसन्नता के लिए किये जाते हैं। व्रत में भगवान शिव का पूजन करके एक समय ही भोजन किया जाता है। साथ ही साथ गले में गौरी-शंकर रूद्राक्ष धारण करना भी शुभ रहता है।
काँवर का महीना
सावन के महीने में भक्त, गंगा नदी से पवित्र जल या अन्य नदियों के जल को मीलों की दूरी तय करके लाते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। कलयुग में यह भी एक प्रकार की तपस्या और बलिदान ही है, जिसके द्वारा देवो के देव महादेव को प्रसन्न करने का प्रयास किया जाता है।
सावन प्रारंभ-  10 जुलाई 2017
सावन अंत- 7 अगस्त 2017

साभार: वेबऐस्ट्रो

Friday, 23 June 2017

पास पड़ोस

कक्षा दो/कलरव/पाठ 2 /पास पड़ोस

कक्षा दो के कलरव पुस्तक का दूसरा पाठ है, पास पड़ोस. इस पाठ को पढ़ाते समय सबसे पहले तो पाठ्य पुस्तक में बनाए गए चित्र का संदर्भ अध्यापक,अध्यापिका ले सकते हैं .. जिन अध्यापक-अध्यापिकाओं की ड्राइंग स्किल अच्छी हो,वह पुस्तक में बनाए गए चित्र के अनुसार ब्लैक बोर्ड पर एक चित्र बना सकते हैं अन्यथा पुस्तक पर बनाए गए चित्र का बच्चों को अवलोकन करने के लिए कहेंगे

जैसा की पाठ के नाम, पास पड़ोस से स्पष्ट है कि इस पाठ के माध्यम से बच्चों को अपने आस पड़ोस में क्या-क्या घटनाक्रम होते हैं क्या क्या वस्तुएं होती हैं,उनके बारे में ज्ञान देना है..जब बच्चे चित्र का भली-भांति अवलोकन कर लें तब बच्चों से चित्र के बारे में कुछ प्रश्न पूछे जैसे कि...

प्रश्न: ग्वाला क्या कर रहा है?
उत्तर: ग्वाला दूध निकाल रहा है।

प्रश्न: मुर्गी और चूजे क्या खा रहे हैं?
उत्तर: मुर्गी और चूजे जमीन पर गिरे दाने को खा रहे हैं।

प्रश्न: नल के पास बैठी स्त्री क्या कर रही है?
उत्तर: नल के पास बैठी स्त्री कपड़े धो रही है।

प्रश्न: पीपल के पेड़ के चबूतरे पर कौन बैठा है?
उत्तर: पीपल के पेड़ के चबूतरे पर दो दोस्त बैठे हुए हैं।

प्रश्न: घर के छत पर कौन सा जानवर बैठा हुआ है?
उत्तर: घर के छत पर बिल्ली बैठी हुई है।

प्रश्न: तार पर क्या सुखाते हैं?
उत्तर : तार पर कपड़े सुखाते हैं।

प्रश्न:चित्र में कपड़े कौन हो रहा है?
उत्तर: चित्र में आदमी कपड़े धो रहा है।

प्रश्न: सड़क पर क्या-क्या दिखाई दे रहा है?
उत्तर: सड़क पर बस बैलगाड़ी साइकल और जीप दिख रही है।

अभ्यास प्रश्न 
(क) बताओ तुम्हारा घर गांव में है या शहर में ?
उत्तर:  गांव में ।

(ख) तुम्हारे गांव का क्या नाम है ?
उत्तर: अध्यापक बच्चों को उनके गांव का नाम बताएगा।

(ग)  तुम्हारे पड़ोस में कौन कौन रहते हैं ?
उत्तर: मेरे पड़ोस में सूरज दीपक पिंकी अमन और निलू रहती है।

(घ) तुम्हारे पड़ोसी क्या क्या काम करते हैं ?
उत्तर: हमारे पड़ोसी खेती करना हल चलाना ट्रैक्टर चलाना दुकान दारी और हलवाई का काम करते हैं ।

(च) तुम्हारे पास पड़ोस में कौन-कौन से जानवर पाले जाते हैं ?
उत्तर:  हमारे पास पड़ोस में गाय आज मुर्गी मुर्गी बकरी बेल वाले कुत्ता पाले जाते हैं ।
प्रश्न 2 : तारे के अंदर किए हुए कार्यों में से छांटकर लिखो:
 (क) रोज किए जाने वाले कार्य :   चाय पीना,बर्तन मांजना, मंजन करना, पढ़ाई करना, खाना पकाना, मुर्गी को दाना डालना, झाड़ू लगाना, कपड़े धोना, बाजार जाना
(ख) कभी-कभी किए जाने वाले कार्य: खेत जोतना, पकवान बनाना, जमीन में खाद देना
(ग) घर में होने वाले कार्य: चाय पीना,बर्तन मांजना, मंजन करना, पढ़ाई करना, खाना पकाना, झाड़ू लगाना, कपड़े धोना, पकवान बनाना
(घ) घर के बाहर होने वाले कार्य :खेत जोतना,बाजार जाना, जमीन में खाद देना, मछली पकड़ना, मुर्गी को दाना डालना

प्रश्न 3:  इस पाठ में कौन-कौन से पशु पक्षी दिखाई दे रहे हैं ? उनके नाम लिखो..
उत्तर: गाय, बकरी, बैल, कुत्ता, मुर्गा, चिड़िया, बिल्ली, मुर्गी
प्रश्न 4:लिखो कौन शहर में पाया जाता है ,कौन गांव में? कौन दोनों में ?
बैल,  गाय,घोड़ा, मोटर, गेहूं के खेत, कारख़ाना दुकानें चक्की सिनेमाघर हल रिक्शा तांगा टेलीविजन

उत्तर: गांव में:  गेहूं के खेत, बैल, गाय, घोड़ा, चक्की, हल, तांगा, दुकाने, टेलीविजन
शहर में : मोटर,कारखाना, दुकाने, सिनेमाघर, रिक्शा, टेलीविजन, तांगा
दोनों में: तांगा, दुकाने, रिक्शा,टेलीविजन

प्रश्न 5 :  पाचवा प्रश्न अधूरे चित्र को पूरा करने का है,पहला चित्र एक बच्चे का है और दूसरा चीज चित्र बगुले का...----------------------------------------




वीडियो:  इस पाठ का क्लासरूम टीचिंग वीडियो जल्द ही उपलब्ध कराया जायेगा 

नोट: यदि इस पाठ से सम्बंधित कोई अन्य सुझाव,लेख,वीडियो आदि आप के पास उपलब्ध हो तो कृपया 8604208968 पर भेजें कमेन्ट बाक्स में अपना सुझाव दें