Thursday, 14 April 2022

इतनी शक्ति हमें देना दाता (Itni Shakti Hamein Dena Data )

इतनी शक्ति हमें देना दाता,
मन का विश्वास कमजोर हो ना।
हम चले नेक रस्ते पे हमसे,
भूलकर भी कोई भूल हो ना।

दूर अज्ञान के हो अंधेरे,
तू हमें ज्ञान की रोशनी दे।
हर बुराई से बचते रहें हम,
जितनी भी दे भली ज़िन्दगी दे।
बैर हो ना किसी का किसी से,
भावना मन में बदले की हो ना।
हम चले नेक रस्ते पे हमसे,
भूलकर भी कोई भूल हो ना।

हम ना सोचें हमें क्या मिला है,
हम ये सोचे किया क्या है अर्पण।
फूल खुशियों के बाँटे सभी को,
सब का जीवन ही बन जाए मधुबन।
अपनी करुणा का जल तू बहा के,
कर दे पावन हर एक मन का कोना।
हम चले नेक रस्ते पे,
हमसे भूलकर भी कोई भूल हो ना।।

इतनी शक्ति हमें देना दाता,
मन का विश्वास कमजोर हो ना।
हम चले नेक रस्ते पे हमसे,
भूलकर भी कोई भूल हो ना।

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हमको नवल उत्थान दो(HUMKO Naval Utthan Do, Maa Saraswati Vardan Do)

हमको नवल उत्थान दो, माँ शारदे वरदान दो।
माँ शारदे हंसासिनी, वागीश वीणा वादिनी।
हमको अगम स्वर ज्ञान दो माँ शारदे  वरदान दो।। 

निष्काम मन हो कामना मेरी सफल हो साधना ।
नवगीत नव लय ताल दो माँ सरस्वती वरदान दो।।
मन,बुद्धि,हृदय पवित्र हो मेरा महान चरित्र हो।
विद्या विनय का ज्ञान दो माँ 
शारदे  वरदान दो।।

हमको नवल उत्थान दो, माँ शारदे वरदान दो।

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हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी(Hey Hans Vahini Gyan Dayini)

हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी

अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥
जग सिरमौर बनाएं भारत,
वह बल विक्रम दे। वह बल विक्रम दे॥
हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी...

साहस शील हृदय में भर दे,
जीवन त्याग-तपोमर कर दे,
संयम सत्य स्नेह का वर दे,
स्वाभिमान भर दे। स्वाभिमान भर दे॥1॥
हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी...

लव, कुश, ध्रुव, प्रहलाद बनें हम
मानवता का त्रास हरें हम,
सीता, सावित्री, दुर्गा मां,
फिर घर-घर भर दे। फिर घर-घर भर दे॥2॥
हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी
अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥

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जयति जय जय माँ सरस्वती(Jayati Jay Jay Maa Saraswati)

जयति जय जय माँ सरस्वती जयति वीणा धारिणी ॥
जयति पद्मासीन माता जयति शुभ वरदायिनी ॥
जगत का कल्याण कर माँ तुम हो विद्या दायिनी ॥

कमल आसन छोड़ दे माँ देख जग की दुर्दशा ॥
शांति की सरिता बहा दे फिर से जग में भारती ॥
जयति जय जय माँ सरस्वती जयति वीणा धारिणी ॥


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या कुन्देन्दुतुषारहारधवला (Ya Kundendu Tusharahara Dhavala )

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवै: सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती नि:शेषजाड्यापहा (श्लोक 1)

शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्वयापिनीं।
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम् ।।
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्।
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवती बुद्धिप्रदां शारदाम् ।।  
(श्लोक )2



अर्थ -
जो विद्या की देवी भगवती सरस्वती कुन्द के फूल, चंद्रमा, हिमराशि और मोती के हार की तरह धवल वर्ण की हैं और जो श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, जिनके हाथ में वीणा-दण्ड शोभायमान है, जिन्होंने श्वेत कमलों पर आसन ग्रहण किया है तथा ब्रह्मा, विष्णु एवं शंकर आदि देवताओं द्वारा जो सदा पूजित हैं, वही संपूर्ण जड़ता और अज्ञान को दूर कर देने वाली मां सरस्वती हमारी रक्षा करें.

शुक्लवर्ण वाली, संपूर्ण चराचर जगत्‌ में व्याप्त, आदिशक्ति, परब्रह्म के विषय में किए गए विचार एवं चिंतन के सार रूप परम उत्कर्ष को धारण करने वाली, सभी भयों से भयदान देने वाली, अज्ञान के अंधेरे को मिटाने वाली, हाथों में वीणा, पुस्तक और स्फटिक की माला धारण करने वाली और पद्मासन पर विराजमान बुद्धि प्रदान करने वाली, सर्वोच्च ऐश्वर्य से अलंकृत, भगवती शारदा (सरस्वती देवी) की मैं वंदना करता या करती हूं।


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हे शारदे माँ (hey sharde Maa)

 

हे शारदे माँ, हे शारदे माँ,
अज्ञानता से हमें तार दे माँ ।
हे शारदे माँ
, हे शारदे माँ,
अज्ञानता से हमें तार दे माँ ।
तू स्वर की देवी
, ये संगीत तुझसे,
हर शब्द तेरा है
, हर गीत तुझसे,
हम हैं अकेले
, हम हैं अधूरे,
तेरी शरण मे
, हमें प्यार दे माँ ।
हे शारदे माँ
, हे शारदे माँ,
अज्ञानता से हमें तार दे माँ ।

मुनियों ने समझी
, गुणियों ने जानी,
वेदों की भाषा, पुराणों की बानी,
हम भी तो समझें
, हम भी तो जानें,
विद्या का हमको
, अधिकार दे माँ ।
हे शारदे माँ
, हे शारदे माँ,
अज्ञानता से हमें तार दे माँ ।

तु श्वेतवर्णी
, कमल पे बिराजे,
हाथों में वीणा
, मुकुट सर पे साजे,
मन से हमारे
, मिटा दे अंधेरे,
हमको उजालों का
, संसार दे माँ ।
हे शारदे माँ
, हे शारदे माँ,
अज्ञानता से हमें तार दे माँ ।

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Wednesday, 13 April 2022

न हो साथ कोई अकेले बढ़ो तुम( Na Ho Saath Koi Akele Bado Tum)

न हो साथ कोई अकेले बढ़ो तुम
सफलता तुम्हारे चरण चूम लेगी।

सदा जो जगाये बिना ही जगा है
अँधेरा उसे देखकर ही भगा है।
वही बीज पनपा पनपना जिसे था
घुना क्या किसी के उगाये उगा है
अगर उग सको तो उगो सूर्य से तुम
प्रखरता तुम्हारे चरण चूम लेगी॥

सही राह को छोड़कर जो मुड़े
वही देखकर दूसरों को कुढ़े हैं।
बिना पंख तौले उड़े जो गगन में
न सम्बन्ध उनके गगन से जुड़े हैं
अगर बन सको तो पखेरु बनो तुम
प्रवरता तुम्हारे चरण चूम लेगी॥

न जो बर्फ की आँधियों से लड़े हैं
कभी पग न उसके शिखर पर पड़े हैं।
जिन्हें लक्ष्य से कम अधिक प्यार खुद से
वही जी चुराकर तरसते खड़े हैं।
अगर जी सको तो जियो जूझकर तुम
अमरता तुम्हारे चरण चूम लेगी॥

न हो साथ कोई अकेले बढ़ो तुम
सफलता तुम्हारे चरण चूम लेगी।