Sunday, 22 October 2017

SOUND 1/ RAINBOW/Lesson 1/CLASS-3


इस अध्याय में अध्यापक छात्रों को विभिन्न ध्वनियों (SOUNDS) के बारे में बतायेंगे. ध्वनियों से सम्बंधित यह पहला अध्याय है अतः इसमें ऐसी ध्वनियों के बारे में बताया जायेगा जिसके मध्य “a” आया हो अर्थात शब्द के हिंदी उच्चारण में “ऐ” आएगा जैसे मैन,कैट,रैट...आदि



 
शब्द
उच्चारण
अर्थ
Mat
मैट
चटाई
Cap
कैप
टोपी
Van
वैन
गाडी /वैन
Tap
टैप
नल
Man
मैन
आदमी
Cat
कैट
बिल्ली

Read aloud : (अध्यापक  छात्रों  को निम्न शब्दों का उच्चारण उचे आवाज में करने के लिए कहेंगे)
an
Fan (फैन)
Van(वैन)
Man(मैन)
Pan(पैन)
ap
Cap(कैप)
Tap(टैप)
Map(मैप)
Lap(लैप)
at
Bat(बैट)
Cat(कैट)
Hat(हैट)
Rat(रैट)

Now we sing: (अध्यापक  छात्रों  को निम्न पंक्तियों  को  उचे आवाज में गाने के लिए  उच्चारण  सहित  बतायेंगे  तथा बच्चे  उसे  दोहराएंगे )
Sam is a man
He has a van
The van has a fan
सैम इज अ मैन
ही हैज अ वैन
द वैन हैज अ फैन
I am a rat
I have a hat
I sat on a mat
आई एम  अ रैट
आई हैव अ हैट
आई सैट आन अ मैट
Look and read: (अध्यापक  पुस्तक में लिखी निम्न पंक्तियों को पढ़ेंगे एवं छात्रों कोअपने साथ दोहराने के लिए कहेंगे .यह बच्चों को ध्वनियों (SOUND) के अभ्यास में सहायक होगा .)

1
A Cat sat on the mat
अ कैट सैट आन द मैट
2
The man is in the van
द मैन इज इन द वैन
3
A rat in on the bat
अ रैट इज आन द बैट

Match the words of list “A” with the same sounding word of list “B” (अध्यापक कालम A और कालम B के एक जैसे ध्वनियों वाले आवाजों को मिलाएं)                           
FAN
VAN
TAP 
CAP
BAG
TAG
BAT 
RAT

Fill in the blanks (man,fan,rat,sat)
(अध्यापक   दिए हुए  4  शब्दों में सही शब्द खाली स्थान में भर कर  सही वाक्य बनायेंगे और छात्रों को बतायेंगे)
1  sam  is  a   man
2 The van has a fan           
3  I am a  rat              
4  I sat on a mat                              

Make a correct word from the jumbled letters given below:
(अध्यापक पुस्तक में दिए हुए शब्दों को सही क्रम में लगाकर निम्न के अनुसार सही शब्द बनायेंगे और छात्रों को बतायेंगे )

Jumbled letters
Correct word
nav
van
atm
mat
nma
Man
nfa
fan
sta
Sat
pat
tap

               

Thursday, 19 October 2017

गोवर्धन पूजा की शुभकामनाएं

दीपावली की अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है। लोग इसे अन्नकूट के नाम से भी जानते हैं।
इस त्यौहार का भारतीय लोकजीवन में काफी महत्व है। इस पर्व में प्रकृति के साथ मानव का सीधा सम्बन्ध दिखाई देता है। इस पर्व की अपनी मान्यता और लोककथा है। गोवर्धन पूजा में गोधन यानी गायों की पूजा की जाती है। शास्त्रों में बताया गया है कि गाय उसी प्रकार पवित्र होती जैसे नदियों में गंगा। गाय को देवी लक्ष्मी का स्वरूप भी कहा गया है। देवी लक्ष्मी जिस प्रकार सुख समृद्धि प्रदान करती हैं उसी प्रकार गौ माता भी अपने दूध से स्वास्थ्य रूपी धन प्रदान करती हैं। इनका बछड़ा खेतों में अनाज उगाता है। इस तरह गौ सम्पूर्ण मानव जाती के लिए पूजनीय और आदरणीय है। गौ के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए ही कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के दिन गोर्वधन की पूजा की जाती है और इसके प्रतीक के रूप में गाय की।
जब कृष्ण ने ब्रजवासियों को मूसलधार वर्षा से बचने के लिए सात दिन तक गोवर्धन पर्वत को अपनी सबसे छोटी उँगली पर उठाकर रखा और गोप-गोपिकाएँ उसकी छाया में सुखपूर्वक रहे। सातवें दिन भगवान ने गोवर्धन को नीचे रखा और हर वर्ष गोवर्धन पूजा करके अन्नकूट उत्सव मनाने की आज्ञा दी। तभी से यह उत्सव अन्नकूट के नाम से मनाया जाने लगा।

गोवर्धन पूजा के सम्बन्ध में एक लोकगाथा प्रचलित है। कथा यह है कि देवराज इन्द्र को अभिमान हो गया था। इन्द्र का अभिमान चूर करने हेतु भगवान श्री कृष्ण जो स्वयं लीलाधारी श्री हरि विष्णु के अवतार हैं ने एक लीला रची। प्रभु की इस लीला में यूं हुआ कि एक दिन उन्होंने देखा के सभी बृजवासी उत्तम पकवान बना रहे हैं और किसी पूजा की तैयारी में जुटे। श्री कृष्ण ने बड़े भोलेपन से मईया यशोदा से प्रश्न किया " मईया ये आप लोग किनकी पूजा की तैयारी कर रहे हैं" कृष्ण की बातें सुनकर मैया बोली लल्ला हम देवराज इन्द्र की पूजा के लिए अन्नकूट की तैयारी कर रहे हैं। मैया के ऐसा कहने पर श्री कृष्ण बोले मैया हम इन्द्र की पूजा क्यों करते हैं? मैईया ने कहा वह वर्षा करते हैं जिससे अन्न की पैदावार होती है उनसे हमारी गायों को चारा मिलता है। भगवान श्री कृष्ण बोले हमें तो गोर्वधन पर्वत की पूजा करनी चाहिए क्योंकि हमारी गाये वहीं चरती हैं, इस दृष्टि से गोर्वधन पर्वत ही पूजनीय है और इन्द्र तो कभी दर्शन भी नहीं देते व पूजा न करने पर क्रोधित भी होते हैं अत: ऐसे अहंकारी की पूजा नहीं करनी चाहिए।

लीलाधारी की लीला और माया से सभी ने इन्द्र के बदले गोवर्घन पर्वत की पूजा की। देवराज इन्द्र ने इसे अपना अपमान समझा और मूसलाधार वर्षा शुरू कर दी। प्रलय के समान वर्षा देखकर सभी बृजवासी भगवान कृष्ण को कोसने लगे कि, सब इनका कहा मानने से हुआ है। तब मुरलीधर ने मुरली कमर में डाली और अपनी कनिष्ठा उंगली पर पूरा गोवर्घन पर्वत उठा लिया और सभी बृजवासियों को उसमें अपने गाय और बछडे़ समेत शरण लेने के लिए बुलाया। इन्द्र कृष्ण की यह लीला देखकर और क्रोधित हुए फलत: वर्षा और तेज हो गयी। इन्द्र का मान मर्दन के लिए तब श्री कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से कहा कि आप पर्वत के ऊपर रहकर वर्षा की गति को नियत्रित करें और शेषनाग से कहा आप मेड़ बनाकर पानी को पर्वत की ओर आने से रोकें।


इन्द्र लगातार सात दिन तक मूसलाधार वर्षा करते रहे तब उन्हे एहसास हुआ कि उनका मुकाबला करने वाला कोई आम मनुष्य नहीं हो सकता अत: वे ब्रह्मा जी के पास पहुंचे और सब वृतान्त कह सुनाया। ब्रह्मा जी ने इन्द्र से कहा कि आप जिस कृष्ण की बात कर रहे हैं वह भगवान विष्णु के साक्षात अंश हैं और पूर्ण पुरूषोत्तम नारायण हैं। ब्रह्मा जी के मुंख से यह सुनकर इन्द्र अत्यंत लज्जित हुए और श्री कृष्ण से कहा कि प्रभु मैं आपको पहचान न सका इसलिए अहंकारवश भूल कर बैठा। आप दयालु हैं और कृपालु भी इसलिए मेरी भूल क्षमा करें। इसके पश्चात देवराज इन्द्र ने मुरलीधर की पूजा कर उन्हें भोग लगाया।
इस पौराणिक घटना के बाद से ही गोवर्घन पूजा की जाने लगी। बृजवासी इस दिन गोवर्घन पर्वत की पूजा करते हैं। गाय बैल को इस दिन स्नान कराकर उन्हें रंग लगाया जाता है व उनके गले में नई रस्सी डाली जाती है। गाय और बैलों को गुड़ और चावल मिलाकर खिलाया जाता है।

Wednesday, 18 October 2017

दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें..(Happy Diwali)

नि:संदेह भारतीय व्रत एवं त्योहार हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। हमारे सभी व्रत-त्योहार चाहे वह होली हो, रक्षा-बंधन हो, करवाचौथ का व्रत हो या दीवाली पर्व, कहीं न कहीं वे पौराणिक पृष्ठभूमि से जुड़े हुए हैं और उनका वैज्ञानिक पक्ष भी नकारा नहीं जा सकता।

दीवाली अथवा दीपावली का पर्व एक पांच दिवसीय त्योहार है।  यह त्योहार सदियों से मनाया जाता है। आइए, दीवाली की पौराणिक कथाओंइसके महत्व व ऐतिहासिक पक्ष को जानें!
त्योहार या उत्सव हमारे सुख और हर्षोल्लास के प्रतीक है जो परिस्थिति के अनुसार अपने रंग-रुप और आकार में भिन्न होते हैं। त्योहार मनाने के विधि-विधान भी भिन्न हो सकते है किंतु इनका अभिप्राय आनंद प्राप्ति या किसी विशिष्ट आस्था का संरक्षण होता है। सभी त्योहारों से कोई न कोई पौराणिक कथा अवश्य जुड़ी हुई है और इन कथाओं का संबंध तर्क से न होकर अधिकतर आस्था से होता है। यह भी कहा जा सकता है कि पौराणिक कथाएं प्रतीकात्मक होती हैं।
कार्तिक मास की अमावस्या के दिन दीवाली का त्योहार मनाया जाता है। दीवाली को दीपावली भी कहा जाता है। दीवाली एक त्योहार भर न होकर, त्योहारों की एक श्रृंखला है। इस पर्व के साथ पांच पर्वों जुड़े हुए हैं। सभी पर्वों के साथ दंत-कथाएं जुड़ी हुई हैं। दीवाली का त्योहार दिवाली से दो दिन पूर्व आरम्भ होकर दो दिन पश्चात समाप्त होता है।
दीवाली का शुभारंभ कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी के दिन से होता है। इसे धनतेरस कहा जाता है। इस दिन आरोग्य के देवता धन्वंतरि की आराधना की जाती है। इस दिन नए-नए बर्तन, आभूषण इत्यादि खरीदने का रिवाज है। इस दिन घी के दीये जलाकर देवी लक्ष्मी का आहवान किया जाता है।
दूसरे दिन चतुर्दशी को नरक-चौदस मनाया जाता है। इसे छोटी दीवाली भी कहा जाता है। इस दिन एक पुराने दीपक में सरसों का तेल व पाँच अन्न के दाने डाल कर इसे घर की नाली ओर जलाकर रखा जाता है। यह दीपक यम दीपक कहलाता है।
एक अन्य दंत-कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन नरकासुर राक्षस का वध कर उसके कारागार से 16,000 कन्याओं को मुक्त कराया था।
तीसरे दिन अमावस्या को दीवाली का त्योहार पूरे भारतवर्ष के अतिरिक्त विश्वभर में बसे भारतीय हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। इस दिन देवी लक्ष्मी व गणेश की पूजा की जाती है। यह भिन्न-भिन्न स्थानों पर विभिन्न तरीकों से मनाया जाता है।
दीवाली के पश्चात अन्नकूट मनाया जाता है। यह दीवाली की श्रृंखला में चौथा उत्सव होता है। लोग इस दिन विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाकर गोवर्धन पूजन करते हैं। 
शुक्ल द्वितीया को भाई-दूज या भैयादूज का त्योहार मनाया जाता है। मान्यता है कि यदि इस दिन भाई और बहन यमुना में स्नान करें तो यमराज निकट नहीं फटकता।
दीवाली की कई पौराणिक कथाएं हैं, इन्हीं में से कुछ इस प्रकार हैं:

दीवाली - रामचंद्र का बनवास काटकर अयोध्या लौटना  
रामायण के अनुसार दीवाली वाले दिन अयोध्या के राजकुमार राम अपने पिता दशरथ की आज्ञा से 14वर्ष का वनवास काटकर तथा लंकानरेश रावण का वध कर पत्नी सीताअनुज लक्ष्मण तथा भक्त हनुमान के साथ अयोध्या लौटे थे। उनके स्वागत में पूरी अयोध्या नगरी दीपों से जगमगा उठी। उसी समय से दीवाली पर दीये जलाकरपटाखे बजाकर तथा मिठाई बांटकर दीवाली का पर्व मनाने की परम्परा आरंभ हुई।

दीवाली - राजा बलि की कथा
पुरातन युग में दैत्यों के राजा बलि ने अपने जीवन में दान देने का वचन लिया था। कोई याचक उससे जो वस्तु माँगता राजा उसे वह वस्तु देता था। उसके राज्य में जीव-हिंसा, मद्यपानवेश्यागमन, चोरी और विश्वासघात उन पाँच महापातकों का अभाव था।
चहुँओर दया, दान अहिंसा, सत्य और ब्रह्मचर्य का बोलबाला था। आलस्य, मलिनता, रोग और निर्धनता उसके राज्य से कोसों दूर थीं। लोग पारस्परिक स्नेह के साथ रहते थे। द्वेष और असूया को रोकने का भरसक प्रयास किया जाता था। अतः इतने अच्छे राज्य का रक्षण करने के लिए भगवान विष्णु ने भी राजा बलि का द्वारपाल बनना स्वीकार कर लिया था। उन्होंने राजा की धर्मनिष्ठा स्मृति को बनाए रखने के लिए तीन दिन अहोरात्रि महोत्सव का निश्चय किया था। यही महोत्सव आज दीपमालिका के नाम से प्रसिद्ध है।

दीवाली - लक्ष्मी गणेश पूजन 
वैसे तो प्राय: लक्ष्मी पूजन के साथ विष्णु की पूजा होती है लेकिन दीवाली को लक्ष्मी और गणेश की पूजा का विधान है। इस विशेष पूजन का क्या कारण है? इस बारे में एक कथा प्रचलित है।
एक बार एक राजा ने प्रसन्न होकर एक लकड़हारे को एक चंदन का वन (चंदन की लकड़ी का जंगल) उपहार स्वरूप दिया।
लकड़हारा ठहरा साधारण मनुष्य! वह चंदन की महत्ता और मूल्य से अनभिज्ञ था।  वह जंगल से चंदन की लकड़ियां लाकर उन्हें जलाकर भोजन बनाने के लिये प्रयोग करने लगा।
राजा को अपने अपने गुप्तचरों से यह बात पता चली तो उसकी समझ में आया कि संसाधन का उपयोग करने हेतु भी बुद्धि (ज्ञान) व ज्ञान आवश्यक है। 
यही कारण है कि लक्ष्मी जी (धन की प्रतीक देवी) और श्री गणेश जी (ज्ञान के प्रतीक देव) की एक साथ पूजा की जाती है ताकि व्यक्ति को धन के साथ साथ उसे प्रयोग करने की ज्ञान भी प्राप्त हो।

दीवाली - देवी लक्ष्मी कथा 
एक अन्य लोक कथा के अनुसार देवी लक्ष्मी इस रात अपनी बहन दरिद्रा के साथ भू-लोक की सैर पर आती हैं। मान्यता है कि जिस घर में साफ-सफाई और स्वच्छता हो, वहां मां लक्ष्मी अपने कदम रखती हैं और जिस घर में ऐसा नहीं होता वहां दरिद्रा अपना डेरा जमा लेती है।
एक और बात ध्यान देने योग्य है कि देवी सीता जो लक्ष्मी की अवतार मानी जाती हैं, वह भी भगवान श्री राम के साथ इसी दिन बनवास से लौट कर आई थी इसलिए भी इस दिन घर की साफ सफाई करके देवी लक्ष्मी का स्वागत व पूजन किया जाता है। 

दीवाली - साधु की कथा
एक बार एक साधु को राजसी सुख भोगने की इच्छा हुई। अपनी इच्छा की पूर्ति हेतु उसने लक्ष्मी की कठोर तपस्या की। कठोर तपस्या के फलस्वरूप लक्ष्मी ने उस साधु को राज सुख भोगने का वरदान दे दिया। वरदान प्राप्त कर साधु राजा के दरबार में पहुंचा और राजा के पास जाकर राजा का राज मुकुट नीचे गिरा दिया। यह देख राजा क्रोध से कांपने लगा। किन्तु उसी क्षण उस राजमुकुट से एक सर्प निकल कर बाहर चला गया। यह देखकर राजा का क्रोध समाप्त हो गया और प्रसन्नता से उसने साधु को अपना मंत्री बनाने का प्रस्ताव रखा।
साधु ने राजा का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया और वह मंत्री बना दिया गया। कुछ दिन बाद उस साधु ने राजमहल में जाकर सबको बाहर निकल जान का आदेश दिया। चूंकि सभी लोग उस साधु के के चमत्कार को देख चुके थे, अत: उसके कहने पर सभी लोग राजमहल से बाहर आ गए तो राजमहल स्वत: गिरकर ध्वस्त हो गया। इस घटना के बाद तो सम्पूर्ण राज्य व्यवस्था का कार्य उस साधु द्वारा होने लगा। अपने बढ़ते प्रभाव को देखकर साधु को अभिमान हो गया और वह अपने को सर्वेसर्वा समझने लगा। अपने अभिमानवश एक दिन साधु ने राजमहल के सामने स्थित गणेश की मूर्ति को वहां से हटवा दिया, क्योंकि उसकी दृष्टि में यह मूर्ति  राजमहल के सौदर्य को बिगाड़ रही थी। अभिमानवश एक दिन साधु ने राजा से कहा कि उसके कुर्ते में सांप है अत: वह कुर्ता उतार दें। राजा ने पूर्व घटनाओं के आधार पर भरे दरबार में अपना कुर्ता उतार दिया किन्तु उसमें से सांप नहीं निकला। फलस्वरूप राजा बहुत नाराज हुआ और उसने साधु को मंत्री पद से हटाकर जेल में डाल दिया। इस घटना से साधु बहुत दुखी हुआ और उसने पुन: लक्ष्मी की तपस्या की।
लक्ष्मी ने साधु को स्वप्न में बताया कि उसने गणेश की मूर्ति को हटाकर गणेश को नाराज कर दिया है। इसलिए उस पर यह विपत्ति आई है क्योंकि गणेश के नाराज होने से उसकी बुद्धि नष्ट हो गई तथा धन या लक्ष्मी के लिए बुद्धि आवश्यक है, अत: जब तुम्हारे पास बुद्धि नहीं रही तो लक्ष्मीजी भी  चली गई। जब साधु ने स्वप्न में यह बात जानी तो उसे अपने किए पर बहुत पश्चाताप हुआ।
साधु को अपनी गलती का अहसास हो गया और उसने पश्चाताप किया तो अगले ही दिन राजा ने भी स्वत: जेल में जाकर साधु से अपनी गलती के लिए क्षमा मांगी और उसे जेल से मुक्त कर पुन: मंत्री बना दिया।
मंत्री बनने पर साधु ने पुन: गणेश की मूर्ति को पूर्ववत स्थापित करवाया, साथ ही साथ लक्ष्मी की भी मूर्ति स्थापित की और सर्व साधारण को यह बताया कि सुखपूर्वक रहने के लिए ज्ञान एवं समृद्धि दोनों जरूरी हैं। इसलिए लक्ष्मी एवं गणेश दोनों का पूजन एक साथ करना चाहिए। तभी से लक्ष्मी के साथ गणेश पूजन की परम्परा आरम्भ हो गई।

दीवाली की महत्ता
श्री रामचन्द्र के चौदह वर्ष का बनवास काटकर इसी दिन अयोध्या लौटने के अतिरिक्त भी कई अन्य दंतकथाएं इस त्योहार के साथ जुड़ी हुई हैं।
धर्मराज युधिष्ठर के राजसूर्य यज्ञ की समाप्ति भी इसी दिन हुई थी।
आर्य समाज के प्रवर्तक स्वामी दयानन्द सरस्वती का निर्वाण भी इसी दिन हुआ था।
जैनियों के चौबीसवें तीर्थकर महावीर स्वामी को भी इसी दिन निर्वाण प्राप्त हुआ था। इसलिए इस त्योहार का अत्याधिक महत्व है।
Author:भारत-दर्शन संकलन

Friday, 15 September 2017

Lesson 1/CLASS-3/Just Move/ Fun Time


FUN Time

Move right, move left,
Move fast, move slow,
And say "how are you?''

दाए घूमों , बाएं घूमों.
तेज घूमों,धीरे घूमों
और बोलो " आप कैसे हैं ?"

Run Front, run back,
Run right Run Left
and say " I am Fine"
सामने दौड़ो,पीछे दौड़ो
दायें दौड़ो, बाए दौड़ो
और बोलो " मैं ठीक हूँ "

Bend your hip to the right,
Bend your hip to the left,
And say "Do you Like"
अपनी कमर को दायें झुकाओ,

अपनी कमर को बायें झुकाओ,
और बोलो " क्या तुम्हे पसंद आया ?''

Jump High, Jump Low,
Jump Fast, jump Slow,
And say "This is what we like".
ऊँचा कूदो,नीचा कूदो 
तेज कूदो,धीरे कूदो 
और बोलो " हमें ये पसंद है "

अध्यापक/अध्यापिका इस कविता के प्रत्येक पैराग्राफ के अनुसार शरीर के हावभाव को परिवर्तित करते हुए बच्चों को, अंग्रेजी में वार्तालाप के कुछ प्रारम्भिक पंक्तियाँ जैसे "How are you"  " i am fine'' "Do you like" अदि समझा सकते हैं.इसके साथ ही साथ कविता के माध्यम से शरीर को दाहिने बाएं तेज या धीरे  घुमाना,आगे पीछे दायें बाएं दौड़ना ,कूदना आदि बता कर हल्का  फुल्का व्यायाम सिखायेंगे.

शब्द
उच्चारण
अर्थ
Move
मूव
घूमना
Right
राईट
दाहिने
Left
लेफ्ट
बाएं
Fast
फ़ास्ट
तेज
Slow
स्लो
धीमा
Run
रन
दौड़ना
Front
फ्रंट
सामने
Back
बैक
पीछे
Bend
बेंड
मोड़ना
Jump
जम्प
कूदना
High
हाई
ऊँचा
Low
लो
नीचा



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 (आशुतोष नाथ तिवारी )