Tuesday, 29 August 2017

प्राथमिक विद्यालय बडका गाँव1 बरहज,का एक दृष्टीबाधित छात्र 75 जिलों के नाम बताते हुए

छात्रों प्रतिभा को यदि सही दिशा देने वाला मिले तो वो नए नए सृजनात्मक आयामो को पा सकती है। दिव्यांगों की शिक्षा का संदर्भ हो तो ये हाशिये पर ही दिखते हैं।
वीडियो में देवरिया जिले के बरहज विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय बड़कागांव-1 का एक दृष्टिबाधित छात्र "किशन चौहान" उत्तर प्रदेश के 75 जिलों के नाम अपने शिक्षक शिखर शिवम त्रिपाठी के निर्देशन में बता रहा है.
ये वीडियो सिर्फ ये बताता है कि सामान्यतया जिन दिव्यांग छात्रों को काम की अधिकता के कारण अध्यापकगण अलग से समय नही दे पाते यदि उन छात्रों की प्रतिभा को निखारा जाये तो अप्रत्याशित परिणाम मिल सकते हैं..
वीडियो लिंक:


आशुतोष की कलम से

Saturday, 19 August 2017

प्रथम सत्र परीक्षा 25/08/2017 से 28/08/2017 तक

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (देवरिया) श्री उपेन्द्र कुमार के निर्देशानुसार  प्रथम सत्र की परीक्षाएं दिनांक  25/08/2017 से 28/08/2017 तक आयोजित की जाएँगी ...

Tuesday, 15 August 2017

आशुतोष को गणतंत्र दिवस पर मिला जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक द्वारा उत्कृष्ट शिक्षक का सम्मान

श्री आशुतोष नाथ तिवारी को गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2017) के अवसर पर शिक्षा में उत्कृष्ट योगदान हेतु, जिलाधिकारी श्रीमती अनीता श्रीवास्तव,पुलिस अधीक्षक मोहम्मद इमरान एवं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी श्री राजीव यादव ने प्रशस्ति पत्र और मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया ..
ज्ञातव्य हो की श्री आशुतोष नाथ तिवारी ने बेसिक शिक्षा परिषद् में नौकरी शुरू करने के 4 माह में ही यह पुरस्कार प्राप्त किया है.  शिक्षा अधिकारी श्री राजीव यादव ने कहा की यह उपलब्धि श्री आशुतोष नाथ तिवारी के शिक्षा और छात्रों के प्रति समर्पण की द्योतक है ..


            
                           







प्राथमिक विद्यालय सोनबह के समस्त अध्यापकगण एवं कर्मचारियों की तरफ से स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनायें

आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। आइये नमन करें उन साढ़े चार लाख क्रांतिकारी वीरों को जिन्होंने हमारे इस "स्वर्णिम भविष्य" के लिए अपना वर्तमान,अपना जीवन, "वंदे मातरम" और "भारत माता की जय" के उदघोष के साथ, स्वतंत्रता की बलिवेदी में होम कर दिया.
मगर एक विचारणीय प्रश्न ये है कि हम कितने स्वतंत्र हैं,गुलाम भारत में कभी भगत सिंह, पंडित बिस्मिल और अशफाक उल्ला खान की आजादी का घोष "वंदेमातरम" "भारत माता की जय", अंग्रेजो को स्वीकार नही था इसलिए उन्हें फांसी दे दी गई..
मगर आज हम स्वतंत्र है..स्वतंत्रता की 71वी वर्षगांठ मना रहे हैं . 70 साल में अशफाक उल्ला खान का "बन्दे मातरम" साम्प्रदायिक हो चुका है, सावरकर और भगत सिंह की "भारत माता" का जयकारा विवादित हो चुका है..और "भारत तेरे टुकड़े होंगे......" के नारे वर्तमान भारत की आधुनिक बुद्धजीविता के मानदंड बन गए???
यक्ष प्रश्न ये है कि, क्या हम फिर बौद्धिक गुलामी की ओर जा रहे हैं?? क्या भारत का जनतंत्र मर रहा है?? क्या इसी भारत की कल्पना की थी फाँसी पर झूलते समय हमारे अमर बलिदानियों ने???
खैर आज ये प्रश्न या विवेचना का दिन नही,आज दिन है जश्न मनाने का,आत्मबोध का...बाधाएँ आती है, आगे भी आते रहेंगी..कलयुग के समुंद्र मंथन का समय है, विष भी निकलेगा।।। 15 अगस्त हमारे उम्मीद,विश्वास और आस्था का दिन है । विश्वगुरु भारत के प्राचीन गौरव को पुनर्स्थापित करने के संकल्प लेने का दिन है..आइये हम सब प्रण लें की अपने मूल अधिकारों के साथ, कर्तव्यों का भी निर्वहन करते हुए "विश्वगुरु भारत" की पुनर्स्थापना में अपना योगदान सुनिश्चित करेंगे...
आप सभी को एक बार पुनः स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं.
जय हिंद, भारत माता की जय..
प्राथमिक विद्यालय सोनबह के समस्त अध्यापक एवं कर्मचारियों की तरफ से स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनायें 
आशुतोष की कलम से

Thursday, 10 August 2017

Drawing Work By students

Sketching is almost everything. It is the painter's identity, his style, his conviction, and then color is just a gift to the drawing.
(Pics: Primary School Sonbah,Rudrapur Deoria..)








 

Monday, 7 August 2017

प्राथमिक विद्यालय सोनबह- रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं..

रक्षाबन्धन भारत का एक प्रमुख त्योहार है, जो प्रतिवर्ष श्रावणमास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।
श्रावण (सावन) में मनाये जाने के कारण इसे श्रावणी (सावनी) या सलूनो भी कहते हैं।रक्षाबन्धन में राखी या रक्षासूत्र का सबसे अधिक महत्त्व है। राखी कच्चे सूत जैसे सस्ती वस्तु से लेकर रंगीन कलावे, रेशमी धागे, तथा सोने या चाँदी जैसी मँहगी वस्तु तक की हो सकती है। राखी सामान्यतः बहनें भाई को ही बाँधती हैं परन्तु ब्राह्मणों, गुरुओं और परिवार में छोटी लड़कियों द्वारा सम्मानित सम्बंधियों (जैसे पुत्री द्वारा पिता को) भी बाँधी जाती है। कभी-कभी सार्वजनिक रूप से किसी नेता या प्रतिष्ठित व्यक्ति को भी राखी बाँधी जाती है। 
अब तो प्रकृति संरक्षण हेतु वृक्षों को राखी बाँधने की परम्परा भी प्रारम्भ हो गयी है। हिन्दुस्तान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघके पुरुष सदस्य परस्पर भाईचारे के लिये एक दूसरे को भगवा रंग की राखी बाँधते हैं। हिन्दू धर्म के सभी धार्मिक अनुष्ठानों में रक्षासूत्र बाँधते समय कर्मकाण्डी पण्डित या आचार्य संस्कृत में एक श्लोक का उच्चारण करते हैं, जिसमें रक्षाबन्धन का सम्बन्ध राजा बलि से स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होता है। भविष्यपुराण के अनुसार इन्द्राणी द्वारा निर्मित रक्षासूत्र को देवगुरु बृहस्पति ने इन्द्र के हाथों बांधते हुए निम्नलिखित स्वस्तिवाचन किया (यह श्लोक रक्षाबन्धन का अभीष्ट मन्त्र है)-
येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल ॥
इस श्लोक का हिन्दी भावार्थ है- "जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बाँधा गया था, उसी सूत्र से मैं तुझे बाँधता हूँ। हे रक्षे (राखी)! तुम अडिग रहना (तू अपने संकल्प से कभी भी विचलित न हो।)"

प्राथमिक विद्यालय सोनबह के समस्त अध्यापकगण एवं कर्मचारियों की तरफ से आप सभी को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं...

Thursday, 27 July 2017

नागपंचमी की शुभकामनाएं

नागपंचमी का पावन त्योहार सबके लिए मंगलकारी हो॥

         🌻 नागपंचमी अर्थात अंधकार में प्रकाश की सम्भावना।  नागों से भी यह शिक्षा लेना चाहिए कि जब तक नागदेवता को आप छेडेगे नही, तकलीफ नही देगे तक तक आपको कोंई क्षति नही पहुचायेगे ,जिस तरह भोलेनाथ प्राणी मात्र के कल्याण के लिए जहर पीकर देव से महादेव बन गए उसी प्रकार हमें भी समाज में व्याप्त निंदा, अपयश, उपेक्षा,और आलोचना रुपी जहर को पीकर मानव से महामानव बनना होगा।
        🌻भगवान् शिव का एक नाम आशुतोष भी है। जल धारा चढ़ाने मात्र से प्रसन्न होने वाले आशुतोष भगवान् शिव का यही सन्देश है कि आपको अपने जीवन में जो कुछ भी और जितना भी प्राप्त होता है, उसी में प्रसन्न और सन्तुष्ट रहना सीखें।
      🌻आओ इस महापर्व को सार्थक बनायें। भगवान् शिव के चरणों में प्रणाम करते हुए अपनी बुराइयों को दूर करने का व्रत हम सब लें ॥ क्योंकि - श्रावण में शिवजी का पूजन करते हुए बिचार करें। शिव होने का अर्थ है, एक ऐसा जीवन जो मैं और मेरे से ऊपर जिया गया हो। जहाँ जीवन तो है मगर जीवन के प्रति आसक्ति नहीं ,और जहाँ रिश्ते तो हैं ,मगर किसी के भी प्रति राग और द्वेष नहीं।
      🌻जहाँ प्रेम तो है मगर मोह नहीं और जहाँ अपनापन तो है मगर मेरापन नहीं। जहाँ ऐश्वर्य तो है मगर विलास नहीं ,और जहाँ साक्षात माँ अन्नपूर्णा है मगर भोग नहीं। जहाँ नृत्य भी है, संगीत भी है, त्याग भी है और योग भी है मगर अभिमान नहीं।
         🌻मित्रों पौराणिक कथाओं के आधार पर भगवान शेषनाग बनकर पूरी तरह से हमारी रक्षा का दायित्व लिया है ,यह पृथ्वी सहस्र फनों पर टिकी हुई है ,भगवान विष्णु क्षीरसागर पर सोते है ,शिवजी के गले मे नागों का ही हार है ,राजा जनमेजय ने अपने पिता के मृत्यु का बदला लेने के लिए सर्पयज्ञ कराया था जिसे ,आस्तीक मुनि ने ही  पंचमी के दिन सर्पयज्ञ बंद करबाया था, जिससे यह त्यौहार बडी धूम धाम से मनाया जाता है ,समुद्र मंथन के समय  भी कालिया नाग को रस्सी बनाकर मथने का कार्य किया इस कारण दुष्ट व्यक्ति मे भी उपकार की भावना धर्म की भावना जागृति हो जाय तो वो भी पूजनीय बन जाता है ऐसा महापुरुषों का कथन है
              🌻अतः इस त्योहार मे हम नागों की पूजा करते है नागकेसर बारह नामो से उनकी पूजा करते है ,धृतराष्ट्र ,कर्कोटक अश्वतर,शंखपाल ,पद्म ,कम्बल ,अनंत ,शेष ,वासुकी ,पागल्भ,तक्षक और कलिया इन नामो से पूजन करने से भगवान शिव तो प्रसन्न ही होते है साथ ही साथ नाग देवता भी हमे आक्षुण्य लाभ प्राप्त की प्राप्ति होती है ,धन यश,कीर्ति ,व्यापार आदि चीजो मे तरक्की होती है ऐसा शास्त्रो का मत है ॥
     🌻अतः जीवन कीहर परिस्थिति मे , और जब हम विषमता में भी जीना सीख जाएँ, जब हम निर्लिप्त रह कर बांटकर खाना सीख जाएँ और जब हम काम की जगह राम में जीना सीख जाएँ, वास्तव में शिव हो जाना ही है। नागपंचमी का त्योहार हमारे लिए पूर्णतया कल्याणकारी सावित होगा ।अतः यह त्योहार सभी के लिए कल्याणकारी हो ,धन धान्यकारी हो ॥

 लेखक: आचार्य भूपेन्द्र मिश्र